एक थी पाकिस्तान क्रिकेट टीम!

पाकिस्तान क्रिकेट टीम हाय-हाय, मिस्बाह तुम शर्म करो, पाकिस्तान टीम घर वापस आ जाओ, कुछ ऐसे ही नारे पाकिस्तान की हर गली में गूंज रहे हैं। पाकिस्तानी फैंस हार के ग़म में डूबे हैं। आंखों में सवाल है कि पाकिस्तान क्रिकेट टीम को आखिर हुआ क्या है? पहले भारत और वेस्ट इंडीज़ के हाथों मिली करारी शिकस्त से पाकिस्तानी क्रिकेट में तूफान मचा हुआ है। फैंस का गुस्सा सातवें आसमान पर है तो पूर्व पाक क्रिकेटर्स जमकर पाकिस्तान क्रिकेट टीम को पानी पी-पी कर कोस रहे हैं। मानों कि पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने दो मैच हारकर सबसे बड़ा गुनाह कर दिया हो।
खेल में हार-जीत का सिलसिला लगा रहता है। कभी जीत का जश्न होता है तो कभी हार का सामना करना पड़ता है। लेकिन जब टीम जीतने की कोशिश करना ही छोड़ दे तो क्या कहेंगे। कुछ ऐसा ही हाल पाकिस्तान क्रिकेट टीम का है। क्रिकेट के सबसे बड़े महासमर में पाकिस्तान क्रिकेट टीम खेलने पहुंची और पहले ही मैच में भारत के हाथों शिकस्त मिली। जैसे कि पुरानी कहावत है कि सिर मुंडाते ही ओले पड़ना। फैंस अभी भारत से मिली हार का ग़म भूले भी नहीं थे कि वेस्ट इंडीज़ ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम को बुरी तरह रौंद दिया। फिर क्या था पाकिस्तान में गुस्से का उबाल आ गया। किसी ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम का जनाज़ा निकाला तो किसी ने अदालत में याचिका दायर कर टीम के वर्ल्ड कप में खेलने पर ही रोक लगाने की मांग कर दी। कुछ पूर्व खिलाड़ियों और फैंस का मानना है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड यानी कि पीसीबी पाकिस्तान टीम की हार की असली वजह है।
आखिर क्यों कभी दुनिया की सबसे मज़बूत टीमों में शुमार रही पाकिस्तान क्रिकेट टीम मुश्किलों में है। पाकिस्तान क्रिकेट टीम जिसने 23 साल पहले ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में इंग्लैंड को हराकर वर्ल्ड कप जीता था। लेकिन अब आलम ये है कि दबाव में ताश के पत्तों की तरह बिखरने में पाक क्रिकेट टीम का कोई सानी नहीं है। इसमें कोई शक़ नहीं कि पाकिस्तान क्रिकेट टीम में टैलेंटेड खिलाड़ियों की भरमार है जो किसी भी दिन मैच विनर बनकर उभर सकते हैं। लेकिन इंटरनेशनल एक्सपोज़र की कमी खिलाड़ियों में साफ झलकती है। एक दशक से ज़्यादा हो गया जब किसी भी विदेशी क्रिकेट टीम (दक्षिण एशिया से बाहर) ने पाकिस्तान का दौरा किया हो, बाकी कसर पाकिस्तान में मौजूद दहशतगर्दी का माहौल पूरा करता है। 2009 में श्रीलंका टीम पर हुए आतंकी हमले ने इंटरनेशनल क्रिकेट बिरादरी पर ऐसा ख़ौफ बैठाया कि लोग पाकिस्तान का दौरा करना दूर, इसके बारे में सोचते भी नहीं। एक तरह से कहा जाए कि इंटरनेशनल क्रिकेट से पाकिस्तान का पूरी तरह बहिष्कार हो चुका है।
ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों से आबू-धाबी और शारजाह में खेलने का मौके छोड़ दिए जाए तो अगर पाकिस्तान विदेशी दौरे पर न जाए तो शायद पाकिस्तान को इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का मौका ही न मिले। यह वो सबसे बड़ी वजह है जिसने पाकिस्तान क्रिकेट को बुरी तरह खोखला किया है। पाकिस्तान की एक पूरी क्रिकेट खेलने वाली जेनरेशन इंटरनेशनल लेवल के कॉम्पिटीशन से महरूम है। इक्का-दुक्का खिलाड़ियों को ज़रूर काउंटी क्रिकेट में खेलने का मौका मिलता हो। लेकिन बाकी खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में ही खुद को तराशा करते हैं। इन सबमें पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड भी कम ज़िम्मेदार नहीं है।
पीसीबी की अंदरूनी राजनीति ने पाकिस्तान क्रिकेट को अर्श से फर्श पर पहुंचाने में खूब मदद की है। एक टीम जिसकी कमान कभी इमरान ख़ान जैसे दिलेर कप्तान के हाथों में थी। क्रिकेट इतिहास के महानतम ऑलराउंडर में शुमार इमरान खान ने क्रिकेट मैदान पर दिलेरी से कप्तानी की और बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया। इमरान ने टीम के साथी खिलाड़ियों को भी बहादुरी से खेलने की प्रेरणा दी। लेकिन इमरान खान के जाने के बाद टीम में आपसी खींचातानी का दौर शुरू हुआ। टीम में कप्तान बनने की कभी न ख़त्म होने वाली रेस शुरू हुई।
1992 में इमरान ख़ान के संन्यास लेने के बाद से 23 साल में पाकिस्तान क्रिकेट टीम में 16 कप्तान बन चुके हैं। इस रेस में रमीज़ राजा, वसीम अकरम, वक़ार यूनिस, मोइन खान, राशिद लतीफ, आमिर सोहेल, सईद अनवर और इंज़माम उल हक़, शाहिद अफरीदी और मौजूदा कप्तान मिस्बाह उल हक़ को मौका मिला। इस लिस्ट में कुछ नाम छोड़ दिए जाए तो बाकी कप्तानों ने अपने-अपने कैंप को मज़बूत करने के चक्कर में टैलेंटड खिलाड़ियों की बलि चढ़ा दी।
2011 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में भारत के खिलाफ शोएब अख़्तर को न खिलाने के फैसले की अहम वजह कोच वक़ार यूनिस और तत्कालीन पाक कप्तान शाहिद अफरीदी की जोड़ी थी। जब वक़ार पाकिस्तानी टीम के कप्तान थे तभी से उनके और शोएब अख़्तर के बीच तनातनी थी। कोच वक़ार यूनिस को शायद इसका हिसाब 2011 वर्ल्ड कप में बराबर करने का मौका मिला। यह तो महज़ एक छोटा सा उदाहरण है, कई पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने सिर्फ अपनी कप्तानी बचाए रखने के लिए PCB से समझौते किए। इसका ख़ामियाज़ा ये हुआ है कि इमरान ख़ान जैसे विज़नरी कप्तान के बाद पाकिस्तान क्रिकेट को जैसे ज़ंग लग चुकी है। धीरे-धीरे आपसी गुटबाज़ी की दीमक पाकिस्तान क्रिकेट टीम को खोखला कर चुका है।
मौजूदा दौर में भी टीम में अंदरूनी राजनीति की वजह से पाकिस्तान टीम की कमान PCB ने मिस्बाह उल हक़ को सौंप दी। पूर्व क्रिकेटर शोएब अख़्तर की माने तो पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास में मिस्बाह उल हक़ सबसे बुज़दिल कप्तान है। मौजूदा पाक टीम के प्रदर्शन पर नज़र डाले तो उनकी बात में दम नज़र आता है। अंग्रेज़ी की मशहूर कहावत है कि लीडर मस्ट लीड फ्रॉम द फ्रंट। लेकिन मिस्बाह इसके ठीक उलट दिखते हैं। वर्ल्ड कप के लिए पाकिस्तान क्रिकेट टीम की सबसे कमज़ोर कड़ी बल्लेबाज़ी है। लेकिन पहले दोनों मुकाबलों में शुरुआती झटकों के बावजूद मिस्बाह उल हक़ ने खुद तीसरे नंबर पर खेलने की हिम्मत नहीं दिखाई। नतीजा ये हुआ कि वेस्ट इंडीज़ के खिलाफ सिर्फ 1 रन पर 4 बल्लेबाज़ पवैलियन लौट चुके थे।
मौजूदा पाक टीम में मिस्बाह तकनीकी तौर पर सबसे मज़बूत बल्लेबाज़ है। बतौर कप्तान उन्हें इस ज़िम्मेदारी का अहसास नहीं हुआ। यूनिस ख़ान को वर्ल्ड कप टीम में शामिल किया जाना ग़लत फैसला था। यूनिस खान इस बात को पहले दो मुकाबलों में अपने फ्लॉप शो से साबित कर चुके हैं। न जाने किस रणनीति के तहत यूनिस ख़ान को वर्ल्ड कप टीम में शामिल किया गया। वो भी तब जब वो लंबे अर्से वनडे टीम से बाहर थे। कई पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर भी इस फैसले की कड़ी आलोचना कर चुके हैं।
वर्ल्ड क्रिकेट में पाकिस्तान क्रिकेट टीम का पतन इंटरनेशनल क्रिकेट के लिए अच्छे संकेत नहीं है। फिलहाल पूर्व क्रिकेटर्स और फैंस को मौजूदा टीम के खिलाड़ियों को वक़्त देना होगा। पीसीबी को भी खिलाड़ियों को भरोसा दिलाना होगा कि युवा खिलाड़ियों को राजनीति का शिकार नहीं होना पड़ेगा और कुछ मैचों में ख़राब प्रदर्शन के बावजूद टीम में उनकी जगह बरक़रार रहेगी। ज़रूरत इस बात की भी है कि पीसीबी ऐसे युवा कप्तान की खोज करें जो न सिर्फ टीम को एक रख सके बल्कि बतौर टीम लीडर अपने प्रदर्शन से साथी खिलाड़ियों में जज़्बा भरें। अब वक्त आ चुका है जब पाकिस्तान क्रिकेट को नए इमरान ख़ान की तलाश है जो पाकिस्तान क्रिकेट टीम को दोबारा कामयाबी की राह पर ला सके। पाकिस्तान क्रिकेट का स्तर बेहतर होने से फैंस को वर्ल्ड क्लास क्रिकेट देखने को मिलेगा। पाकिस्तान क्रिकेट से वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी मैदान पर उतरेंगे। जो हारने के नहीं बल्कि जीतने के जज़्बे से मैदान पर खेलेंगे। तब पाकिस्तान क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया, भारत और द.अफ्रीका जैसी दुनिया की सबसे मज़बूत टीमों से बराबरी का मुकाबला करेगी।