जम्मू कश्मीर के संविधान को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

जम्मू कश्मीर के संविधान को भारतीय संविधान के खिलाफ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। गुरुवार को कोर्ट में दाखिल याचिका में जम्मू कश्मीर के संविधान को भारतीय नागरिकों के साथ भेदभाव करने वाला बताते हुए रद करने की मांग की गई है। भारतीय संसद से अनुच्छेद 370 में संशोधन का हक छीनने वाले राष्ट्रपति आदेश 1954 को भी रद करने की मांग की गई है। कहा गया है कि कोर्ट घोषित करे कि भारतीय संसद को अनुच्छेद 368 के तहत कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को संशोधित करने का अधिकार हैसुप्रीम कोर्ट में यह याचिका मालेगांव विस्फोट में आरोपी मेजर रमेश उपाध्याय समेत चार लोगों ने अपने वकील हरिशंकर जैन के जरिए दाखिल की है। याचिका में जम्मू कश्मीर के संविधान की वैधानिकता को चुनौती देते हुए कहा गया है कि ये नियमों के अनुरूप गठित संविधान सभा ने नहीं बनाया है। राज्य का कानून भारतीय संविधान के प्रावधानों को निष्क्रिय नहीं कर सकता और न ही भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों में कटौती कर सकता हैयाचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति अनुच्छेद 370;1द्ध;डीद्ध के तहत जम्मू कश्मीर के बारे में प्राप्त शक्तियों के तहत जम्मू कश्मीर राज्य निवासियों को ऐसे विशेष अधिकार नहीं दे सकते जिनका लाभ भारतीय नागरिकों को न मिले। जम्मू कश्मीर के बारे में राष्ट्रपति आदेश 1954 के कुछ प्रावधान भारतीय संविधान के खिलाफ हैं इसलिए उन्हें असंवैधानिक घोषित किया जाए। कहा गया है कि अनुच्छेद 370 का प्रावधान अनिश्चित काल के लिए नहीं था।

जम्मू कश्मीर संविधान की धारा 6ए7ए8ए9 और 10 भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। जम्मू कश्मीर में सिर्फ वहां के स्थाई निवासियों को चुनाव लड़ने का अधिकार है कोई और व्यक्ति स्वयं को वहां मतदाता पंजीकृत नहीं करा सकता न ही वहां संपत्ति खरीद सकता है जबकि जम्मू कश्मीर का निवासी देश में कहीं भी संपत्ति खरीद सकता हैए नौकरी कर सकता है यहां तक कि मतदाता का अधिकार पा सकता है।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे भारत के नागरिक हैं और जम्मू कश्मीर में संपत्ति खरीद कर बसना चाहते हैं लेकिन जम्मू कश्मीर के संविधान और राष्ट्रपति आदेश 1954 के प्रावधान उसमें बाधा बन रहे हैं।

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