जल मीनार जर्जर स्थिति में, नहीं हो रहा पुनर्निर्माण

पाकुड़। विगत 30 वर्षों से हिरणपुर बाजार स्थित जल मीनार जर्जर स्थिति में पड़ा हुआ है। यहां की जनता इसके पुनर्निर्माण की स्वीकृति की वर्षों से बाट जोह रही है।
वर्ष 1980 में यहां पानी की किल्लत को देखते हुए इस जल मीनार का निर्माण करवाया गया था। निर्माण के पांच-छह वर्षों तक तो इससे लोगों को पानी की नियमित आपूर्ति होती रही लेकिन कुछ दिन बाद लोगों को पानी मिलना बंद हो गया था जिसकी वजह इसमें आई खराबी बतायी गई। तत्कालीन विभागीय अधिकारियों ने इसे शीघ्र ही दुरूस्त कर दुबारा जलापूर्ति का भरोसा भी दिलाया था। इसकी मरम्मत के लिए उन्होंने प्राक्लन बनाकर तत्कालीन बिहार सरकार के अधीनस्थ विभागीय अधिकारियों को भेजा था लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई । धीरे-धीरे विभाग ने इसे बेकार घोषित करते हुए इसके पुनर्निर्माण की बात कह दी।
जल मीनार से जलापूर्ति बंद होने के चलते हिरणपुर बाजार सहित इससे सटे गांवों के लोगों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ा। जल मीनार को चालू करवाने अथवा उसके पुनर्निर्माण को लेकर कोई जनप्रतिनिधि भी आगे नहीं आ रहा है। लोगों का आरोप है कि अगर विभाग थोड़ी सी भी सक्रियता दिखाता तो शायद उन्हें पेयजल की समस्या से जूझना नहीं पड़ता।
जल मीनार को मुद्दा बनाकर बटोरे वोट
हर लोकसभा, विधानसभा चुनाव में ही नहीं पंचायत और जिला परिषद के चुनाव तक में उम्मीदवार जल मीनार को मुद्दा बनाकर वोट बटोरते आए हैं । लोग इस उम्मीद में वोट डालते रहे हैं कि लेकिन चुनाव की समाप्ति के साथ ही यह मुद्दा भी अगले चुनाव तक बंद कर दिया जाता है ।
झामुमो विधायक साइमन मरांडी और उनकी पत्नी स्व. सुशीला हांसदा का वर्ष 1980 से ही लिट्टीपाडा विधानसभा सीट पर कब्जा रहा है। वर्तमान में भी साइमन मरांडी ही यहां के विधायक हैं। उनका स्थायी आवास भी यहीं है, बावजूद इसके वे आज तक इस समस्या का कुछ कर नहीं सके। जब हेमंत सोरेन की सरकार में साइमन मरांडी मंत्री बने थे तो लोगों को लगा था कि अब जल मीनार बनवा दिया जाएगा लेकिन लोगों को निराशा ही हाथ लगी।
लिट्टीपाडा के दिवंगत झामुमो विधायक अनिल मुर्मू ने संजीदगी से इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था। इसके मद्देनजर 30 जनवरी 2016 को अधीक्षण अभियंता दुमका तनवीर अख्तर ने प्रखंड के रानीपुर स्थित परगला नदी, हाथकाठी आदि में स्थल चुनाव के लिए जांच भी की थी। उसके बाद तत्कालीन जिला पेयजल और स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता रासबिहारी सिंह ने जल मीनार के नव निर्माण के लिए तकरीबन 14 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार कर रांची भेजा था। लेकिन अभी तक उसे विभागीय अधिकारियों की स्वीकृति नहीं मिल पाई है। वर्तमान कार्यपालक अभियंता सुनील कुमार ने बताया कि भेजे गए डीपीआर को स्वीकृति मिलने के बाद ही इस समस्या का समाधान संभव है।
अगर इस जल मीनार के डीपीआर को स्वीकृति मिल जाती है और इसे जल्द चालू करवा दिया जाता है, तो हिरणपुर बाजार के अलावा सुंदरपुर, नामोपाडा, रानीपुर, हाथकाठी आदि के कमोबेश दस से बारह हजार परिवारों को राहत मिलेगी ।