स्मृति और कठेरिया पर यूजीसी सदस्य ने उठाए सवाल

नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की कमान संभाल रहे मंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर विवाद गहराने लगा है। इस कड़ी में यूजीसी के सदस्य व पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त एमएम अंसारी ने आवाज बुलंद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंत्रियों को बदलने का आग्रह किया है। यह पहला मौका है, जब किसी यूजीसी सदस्य ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय संभाल रहे मंत्रियों की योग्यता पर सवाल उठाए हैं।
अंसारी ने आयोग के अन्य सदस्यों व शिक्षाविदों को भेजे संदेश में इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री के पास चलने का भी आग्रह किया है। दैनिक जागरण से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है, जब शिक्षा की देखरेख करने वालों की शैक्षणिक साख ही संदिग्ध है। ऐसे में देश के सबसे बड़े शैक्षणिक तंत्र को चलाने व उसका नेतृत्व करने की क्षमता पर सवाल उठना लाजिमी है।
अंसारी ने कहा कि उन्हें मोदी पर पूरा भरोसा है। जब पीएम अन्य मंत्रालयों में योग्य व्यक्तियों को मंत्री बना सकते हैं तो मानव संसाधन विकास मंत्रालय में क्यों नहीं? अंसारी के मुताबिक, वह आयोग के अन्य सदस्यों व अन्य शिक्षाविदों के साथ प्रधानमंत्री से मिलकर उनका ध्यान इस ओर आकृष्ट करेंगे।
बीते सप्ताह मानव संसाधन विकास मंत्रालय में भेजे गए राज्य मंत्री राम शंकर कठेरिया की डिग्री में कथित हेराफेरी के आरोपों का हवाला देते हुए अंसारी ने कहा कि यदि धोखाधड़ी करने वाले लोग शिक्षा मंत्रालय संभालेंगे तो हम बच्चों के आगे क्या मिसाल रख पाएंगे?
कठेरिया बोले, आरोप साबित हुए तो संसद से त्यागपत्र दे दूंगाः
मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री राम शंकर कठेरिया के खिलाफ प्रतिपक्षी बीएसपी प्रत्याशी ने 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जाली अंक सूची बनाने को लेकर शिकायत की थी। उच्च न्यायलय ने मामले को आगरा सत्र न्यायालय को भेज दिया है, जिस पर 26 नवंबर को सुनवाई होनी है। हालांकि कठेरिया ने इस संबंध में सभी आरोपों को नकार दिया है।
मामले को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा कि यदि आरोप साबित होते हैं तो वह सरकार ही नहीं संसद से भी इस्तीफा दे देंगे। उन पर स्नातक द्वितीय वर्ष की अंक सूची में हिंदी व अंग्रेजी में हासिल अंकों को खुद ही बढ़ा लेने का आरोप है।
गौरतलब है कि इससे पहले केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठे थे। मई 2014 में जब उन्हें इस अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई तो इस बाबत कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए गए थे। हालांकि मामले को लेकर पार्टी और सरकार ने ईरानी का साथ दिया और उनकी नेतृत्व क्षमता के साथ खड़ी नजर आई।