चक्रधरपुर में मनाया गया हिंदी पत्रकारिता दिवस, कोरोना काल में पत्रकारों की स्थिति पर हुई विचार गोष्ठी

रामगोपाल जेना
चक्रधरपुर: कोरोना से बचाव के लिए पत्रकारों के बीच बांटा गया कोरोना रोधी किट झारखण्ड यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट और सिंहभूम जर्नलिस्ट एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में चक्रधरपुर वन विश्रामागार में रविवार को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया गया. इस मौके पर झारखण्ड यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट के कार्यकारी अध्यक्ष राजीव नयनम, सिंहभूम जर्नलिस्ट एसोसियेशन के अध्यक्ष गौरीशंकर झा समेत चाईबासा, चक्रधरपुर गोईलकेरा, सोनुआ, बंदगाँव समेत तमाम ईलाकों से दर्जनों पत्रकार एकत्रित हुए और मौजूदा कोरोना काल में में पत्रकारों की स्थिति पर विचार गोष्ठी किया. इससे पहले कोरोना से जंग लड़ते हुए स्वर्ग सिधार गए चक्रधरपुर के पत्रकार स्वर्गीय राजेश पति को श्रद्धांजलि दी गयी. उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर नमन किया गया और दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गयी. इस दौरान सभी पत्रकारों को कोरोना से बचाने के लिए कोरोना किट बैग भी उपलब्ध कराया गया. जिसमें मास्क, सेनेटाईजर, भाप मशीन, हेंड वाश, ग्लव्स आदि सामग्री मौजूद थी. पत्रकार संगठन के द्वारा सभी पत्रकारों के कोरोना काल में बेहतर और कोरोना मुक्त स्वास्थ्य की कामना की गयी.

कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए पत्रकारों ने अपना अपना विचार रखते हुए बताया की कोरोना काल में पत्रकारिता पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है. एक एक कर कई पत्रकार साथी संक्रमित होकर काल के गाल में समा गए. कई पत्रकार साथी आज भी अस्पताल में भर्ती हैं और जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. पत्रकार जान जोखिम में डालकर कोरोना काल में भी देश दुनिया आसपास हो रहे घटनाक्रम को कवर कर लोगों को समाचार, सुचना और सन्देश पहुंचा रहे हैं लेकिन सरकार पत्रकारों को वो महत्व नहीं दे रही है जिसका पत्रकार हक़दार है.

आजतक सरकार ने पत्रकारों को ना तो कोरोना योद्धा माना और ना ही कोरोना फ्रंट लाइन वर्कर्स. यही वजह रही की पत्रकारों को वेक्सिन आने के बाद भी कई दिनों तक टीका नहीं लग पाया. नतीजा यह हुआ की बड़ी संख्या में पत्रकार संक्रमित हो गए और राज्य में दोस दर्जन से ज्यादा पत्रकारों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. सिंहभूम जर्नलिस्ट एसोसिएशन लगातार सरकार से मांग कर रही है की पत्रकारों को फ्रन्ट लाइन कोरोना वॉरियर्स घोषित कर पत्रकारों को सुविधा मुहैया करे, मृतक पत्रकार के परिजनों को मुआवजा दे ताकि पत्रकारों को सुरक्षा का अहसास हो सके  लेकिन इसके बावजूद राज्य सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रहा है. पत्रकारों ने सरकार की पत्रकारों के प्रति ऐसी उदासीनता की घोर निंदा की.

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