आज हम अपनी ही मातृभाषा से दूर हो रहे हैं: मनोज यादव

बरही से बिपिन बिहारी पाण्डेय

बरही: भाजपा नेता सह बरही विस के पूर्व विधायक मनोज यादव ने हिन्दी दिवस पर कहा कि आज हमारे ही देश में हिन्दी के स्थान पर लोग अंग्रेजी को महत्व दे रहे हैं। इससे आने वाले समय में हिन्दी लूप्त हो जायेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि हम सभी को अपने मातृभाषा के सम्मान के साथ अपने दिनचर्या में हिन्दी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिए। श्री यादव ने कहा की सूर की राधा दुखी, तुलसी की सीता रो रही है,
शोर डिस्को का मचा है, किन्तु मीरा सो रही है,
सभ्यता पश्चिम की, विष के बीज कैसे बो रही है,
आज अपने देश में, हिन्दी प्रतिष्ठा खो रही है
कबीर की वाणी से समाज मे जागृति लाने से लेकर जायसी की वाणी से ईश्वर से प्रेम सिखाने वाली ,सूर के ईश्वर से सखा प्रेम से लेकर तुलसी के राम की मर्यादा को प्रदर्शित कर जन जन को प्रेरणा देने वाली,मीरा और महादेवी की प्रेम की पीड़ा की अभिव्यक्ति से लेकर जयशंकर प्रसाद के आंसुओं की करुण झांकी प्रस्तुत करने वाली निराला का निराले ढंग से शोषिक वर्ग का विरोध से लेकर प्रेमचंद की सामाजिक वास्तविकता को उजागर करने की क्षमता को प्रदर्शित करने वाली ,पंत के प्रकृति प्रेम से लेकर माखनलाल चतुर्वेदी के राष्ट्रप्रेम को उजागर करने वाली ,अज्ञेय और दिनकर की स्वतंत्रता की क्रांति उत्पन्न करने वाली वाणी से लेकर नागार्जुन और दिनकर की लोकतंत्र की और समाजवाद की स्थापना के प्रयास को अभिव्यक्त करने वाली, नौ रसो के माध्यम से मनुष्य के जीवन के हर एक भाव की सहज रूप से व्याख्या करने वाली पवित्र हिंदी, सौ करोड़ से ज़्यादा लोगों को स्पर्श करने वाली हृदय-भाषा ‘हिन्दी’ आज इतनी दीन-हीन क्यों है।
अपने ही देश में हिंदी दिवस मनाने को क्यों मजबूर हो गए, अंग्रेजियत के इतने हुए गुलाम कि अपनी ही भाषा से दूर हो गए।