मेदिनीनगर:आजादी के 73 साल बाद भी पुलिया और सड़क के लिए तरस रहे कुकही गांव के लोग

पलामू से सुधीर कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

मेदिनीनगर: आजादी के 73 वर्ष बाद भी हुसैनाबद के कुकही गांव के लोग सड़क और पुल के लिए तरस रहे है।नदी पर पुलिया नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। किसानों को भी बीज और खाद के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव के लोगों ने इस गंभीर समस्या को लेकर जनप्रतिनिधि सहित जिला अधिकारियों से गुहार भी लगाते रहे है, लेकिन उनकी समस्या का निराकरण नहीं हो पा रहा है।
हुसैनाबद से 9 किमी दूर कुकही गांव में नदी से आने जाने के रास्ते के बीच नदी में पुल नहीं होने सेे यह गांव 2 भागों में बंट गया है। बारिश में सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए ले जाने के दौरान होती है।छोटे बच्चो को झोली में बांधकर नदी पार करना पड़ता।पानी बढ़ जाने के बाद गांव से बाहर आने के लिए नदी में तैरकर आना पड़ता। गांव के स्थानीय ग्रामीण- पांचू मेहता ,नागेन्द्र मेहता , चन्दन मेहता , इंद्रदेव मेहता ,मोहन मेहता ने बताया कि आजादी के 73 साल बाद भी इस नदी पर पुल का निर्माण नहीं कराया जा सका। ग्रामीणों ने बताया कि कुकही में सड़क व पुल नहीं बनने से गांव तक पहुंचने में ग्रामीणों को परेशानी होती है। नदी पर पुल निर्माण को लेकर कई बार विधायक और सांसद को आवेदन देकर गुहार लगाई। उनसे आश्वासन मिला, लेकिन उस पर अमल नहीं हो सका। गांव के लोग सड़क और पुल जैसी समस्या से जूझ रहे है।ने बताया कि सरकार केवल विकास का ढोल पिट रही है। उनके गांव तक आएं तो विकास की असलियत दिख जाएगी। गांव में पुल की समस्या है। पंचायती राज व्यवस्था में भी लोगों की समस्या का समाधान न होना दुखद है।
लंबे समय कर रहे पुलिया निर्माण की मांग
छात्र चन्दन मेहता ने बताया कि गांव के लोग जिला प्रशासन से लंबे समय से पुल बनाने की मांग कर रहे है। यदि पुल का निर्माण हो जाता है, तो एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को इसका लाभ मिलेगा। पुल नहीं होने से ग्रामीणों को बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। बारिश के मौसम में नदी में जलस्तर काफी बढ़ जाता है। इससे ग्रामीणों को नदी पार करने में काफी परेशानी होती है। इसकी वजह से ग्रामीणों को गांव से बाहर निकलने के लिए करीब 8 km का चक्कर लगाना पड़ता है।वर्तमान में नदी बहाव कम है। इसकी वजह से स्थानीय ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार कर निकल जाते है। बारिश शुरू होते ही लोगों के लिए नदी मुसीबत बन जाती है।
पुलिया बनती है,लोगो को इस परेशानी से मुक्ति मिल सकती है।
पिछले कई साल से एक दर्जन से अधिक गांव के लोग जिला प्रशासन, क्षेत्रीय विधायक व सांसद से पुल निर्माण की मांग कर रहे है,इसके बावजूद इनका कोई ध्यान नहीं है,ग्रामीणों की समस्या जस की तस बनी हुई है।