कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कीट नियंत्रण की दी जानकारी

गोड्डा: जिला में खरीफ मौसम में मक्का की फसल मुख्य रूप से गोड्डा,पोड़ैयाहाट, सुन्दरपहाड़ी क्षेत्र में ऊपरी जमीन में लगाया जाता है। ग्रामीण विकास ट्रस्ट-कृषि विज्ञान केंद्र,गोड्डा के सौजन्य से पोड़ैयाहाट प्रखंड के धारोफट्टा,केलाबाड़ी ग्राम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों के खेत पर भ्रमण किया ।
भ्रमण के दौरान खरीफ मक्का फसल में फाॅल आर्मी वर्म कीट(सैनिक कीट) के प्रकोप को भारी मात्रा में देखा गया। पौधा सुरक्षा वैज्ञानिक डाॅ सूर्यभूषण ने किसानों को फाल आर्मी वार्म कीट को मक्का के पौधे से निकाल कर पहचान कराई। यह पिल्लू अवस्था ही मक्का की फसल को बहुत नुकसान पहुंचाता है। इसके पिल्लू मुलायम त्वचा वाले होते हैं, जो कि बढ़ने के साथ हल्के हरे या गुलाबी से भूरे रंग के हो जाते हैं। छोटा पिल्लू पौधों की पत्तियों को खुरचकर खाता है,जिससे पत्तियों पर सफेद धारियां दिखाई देते हैं। जैसे-जैसे पिल्लू बड़ा होता है, पौधों की ऊपरी पत्तियों को खा जाता है और पिल्लू बड़ा होने के बाद मक्का के गाभा में घुसकर पत्तियां खाता रहता हैं। पत्तियों पर बड़े गोल-गोल छिद्र एक ही कतार में नजर आते हैं।
कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी कि किसान भाई फाॅल आर्मी वर्म कीट (सैनिक कीट) के नियंत्रण हेतु तत्काल इमामेक्टिन बेन्जोएट 5 एसजी 0.4 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें, तत्पश्तात 15 दिन बाद लेम्डा साइलोथ्रिन 5 ई.सी. दवा का 1 मिली मात्रा 1 लीटर पानी में घोलकर दो बार मक्का की फसल पर छिड़काव करें। मौके पर डाॅ हेमन्त कुमार चौरसिया, डाॅ अमितेश कुमार सिंह, डाॅ रितेश दुबे, नरेन्द्र हांसदा, बबलू हांसदा, मार्शल हांसदा, तालको मरांडी, दुलड़ सोरेन आदि प्रगतिशील महिला-पुरूष किसान प्रशिक्षण में सम्मिलित हुए।