विद्यार्थियों के लिए वरदान साबित हो रहा एपीजे अब्दुल कलाम पुस्तकालय

बोकारो से जय सिन्हा
बोकारो:  देश की चरमराई शिक्षा व्यवस्था के बीच बोकारो जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर स्थित पेटरवार प्रखंड कि चरगी पंचायत में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए 2014 में स्थापित “डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम पुस्तकालय” गांव की शोभा में ना सिर्फ चार चांद लगा रहा है बल्कि यह पुस्तकालय ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थयों के लिए वरदान साबित हुआ है। इस पुस्तकालय में कक्षा छह से लेकर स्नातक तक पुस्तकें होने के साथ साथ विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी हेतु पर्याप्त मात्रा में पुस्तकें उपलब्ध है जिसका निशुल्क लाभ चरगी पंचायत सहित आस पास के पंचायत के सैकड़ों विद्यार्थी ले रहें हैं। इसके अध्ययन कक्ष में लगभग 50 विद्यार्थी एक साथ बैठकर शांतिपूर्ण माहौल में अध्ययन करते हैं। हालांकि अभूतपूर्व कोरोना महामारी में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा जारी निर्देशानुसार पुस्तकालय के संस्थापक व डॉ कलाम फाउंडेशन के अध्यक्ष नीरज कमार उर्फ नीरज करमाली ने बैठकर अध्ययन करने पर रोक लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार के द्वारा नई दिशानिर्देश जारी करने के बाद जल्द ही इसे पुनः विद्यार्थियों के लिए खोल दी जाएगी।
कैसे बना पुस्तकालय: बेहद कम उम्र से ही सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाला गांव का ही एक बेहद प्रतिभावान युवक नीरज अपने स्कूली दिनों में अपने से छोटे एवम् अपने सहपाठियों को एक जर्जर हो चुकी सामुदायिक भवन में हर रोज बैठाकर पढ़ाया करते थें। पढ़ाने के दौरान इन्होंने महसूस किया कि गांव के काफी बच्चों को पुस्तकों कि समस्या से जूझना पड़ता है तभी इन्होंने इस समस्या को दूर करने की योजना बनाई परन्तु इसे मूर्त रूप देने में पूरे दो वर्ष लगें। इन्होंने झारखंड के प्रतिष्ठित महाविद्यालय संत जेवियर्स कॉलेज, रांची” में अपनी उच्चतर माध्यमिक(2012-2014) की शिक्षा ग्रहण करने के दौरान उसी कॉलेज के पुस्तकालय अध्यक्ष से जरूरी पुस्तकों की सूची बनवाई फिर सामूहिक चंदा कर वे जरूरी किताबों को खरीदा। परन्तु समस्या अभी भी खत्म नहीं हुई, अभी भी एक भवन की जरूरत थी पर सही भवन नहीं मिली। अंत में नीरज ने सांसद मद से 1999 में बनी उसी जर्जर सामुदायिक भवन को चुना जहां वह अपने गांव के बच्चों एवम् सहपाठियों पढ़ाया करता था।
नीरज के इस पहल को देखकर गांव वालों ने भरपूर सहयोग किया और उस जर्जर भवन को मरम्मत करवाने हेतु सामूहिक चंदा दिया। इस पुस्तकालय में अब तक 2015 में पेटरवार प्रखंड के तत्कालीन प्रमुख 13 वित आयोग से 2 लाख 51 हजार पास करा कर कंप्यूटर सहित सैकड़ों पुस्तकें उपलब्ध करा चुके हैं। इनके अलावा सैकड़ों लोग इस पुस्तकालय में पुस्तकें दान दे चुके हैं जिनमें एचएससीएल के पूर्व निदेशक बी के झा, उत्तरप्रदेश सरकार से राष्ट्र भाषा सम्मान से समनित हो चुकी लेखिका राजेश्वरी झा, विधायक लम्बोदर महतो आदि ने अपने स्तर से मदद की हैं।

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