अपराधियों को पकड़ने के बजाए आंदोलनकारियों पर पुलिस कर रही एफआईआर : त्रिलोकी 

मेदिनीनगर:  छात्रा सोनम के हत्या का एक महीना बीत जाने के बाद भी अपराधियों को पुलिस गिरफ्तार नही करती हैं तब 31 मई और 1 जून को मेराल गांव के ग्रामीण जनता ने लॉक डाउन में शारीरिक दूरी का पालन करते हुए शांति पूर्ण तरीके से अपराधियों को पकड़ने कि मांग कर रही थी। ग्रामीण जनता आंदोलन कर अपने अपने घर चले गए थे ,वहां से आइसा व माले नेता दिव्या भगत और पवन विश्वकर्मा भी जा चुके थे। गांव में पुलिस 1 घंटे बाद अयी और अनान फानन में पीड़िता के घर पर गली गलौज करने लगी,जब गांव वाले पुलिस की हरकत पर प्रतिरोध व्यक्त किया तो उन्हें भी धमकी दी,और फायरिंग तक किया। जिसमे एक 13 साल की बच्ची रिया, बाल बाल गोली से बची।

पाटन थाने के अधिकारी को बंधक बना लेने के बात सुन कर आइसा और माले नेता वापस गांव आए जहां वो लोग शांति के साथ डीएसपी के साथ बैठ कर संवाद किया और उसके बाद डीएसपी संदीप गुप्ता ने गांव वालों को 24 घंटे के अंदर अपराधियों को पकड़ लेने का व थाना प्रभारी को निलंबित करने का आश्वाशन दिया था।,
वहां से वापस जाते ही पुलिस, उल्टा गांव वालों और नेताओं पर 307 और 353 जैसे अन्य धाराओं के साथ नामजद और 200 पर अज्ञात एफआईआर कर केस कर देती है।
नेताओं और ग्रामीणों पर 307, धारा मतलब जान से मारने कि कोशिश करने का आरोप लगाया है, जबकि जनता के साथ पुलिस कई घंटा तक रही है। पुलिस को जान से मारने का नियत जनता की रहती तो पुलिस शांति पूर्ण तरीके से तीन घंटा तक कैसे रही? उसके बाद डीएसपी से शांतिपूर्वक वार्ता कैसे हुआ? मेराल पाटन रेप और हत्या कांड में एसपी से लेकर पूरी पुलिस प्रशासन अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए उल्टा ग्रामीणों को झूठे धाराओं में फसा रही है। जिससे प्रतीत होता हैं कि
पुलिस ग्रामीणों की आवाज दबाने के लिए किसी हद तक जा सकती है। आज जब पूरे विश्व में पुलिस के काम करने के तरीके पर आवाज उठ रहा है, आंदोलन हो रहा है तो झारखंड पलामू की भी पुलिस भी उसी तरफ इशारा कर रही है कि यहां भी संस्थागत बदलावों की जरूरत है।आम जनता और खास कर गरीब, दलित, माइनॉरिटी, आदिवासी को पुलिस बराबर का इंसान नहीं बल्कि दोयम दर्जे का नागरिक समझती है, जिसे जब चाहे जैसे चाहे मारा, पीटा या झूठे धाराओं में फंसाया जा सकता है।
देश में बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ सिर्फ ढकोसला हैं। एक तरफ बेटी के हत्या हो रही हैं तो दूसरी तरफ न्याय मागने वाले लोगों पर एफआईआर हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने सरकार बनने से पहले कहा था कि झारखंडियों के न्याय सम्मान के लिए लड़ेगे लेकिन सरकार बनते ही आदिवासी छात्रा सोनम के हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग पर पुलिस आंदोलनकारियों पर झूठा केस कर रही है।
आंदोलकारियों के केस वापस नहीं होती हैं तो 6 मई को आइसा राज्यव्यापी प्रदर्शन करेंगी।