बच्चों के लिए वैकल्पिक शिक्षा को लेकर राज्य परियोजना निदेशक ने पूरे प्रदेश के शिक्षकों के साथ की चर्चा

पाकुड़ : लॉक डाउन की वजह से पिछले 17 मार्च से राज्य के सभी विद्यालय बंद हैं जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है । बच्चों की पढ़ाई का वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए राज्य स्तर से डीजी साथ कार्यक्रम का संचालन पूरे प्रदेश में किया जा रहा है। शुक्रवार को राज्य परियोजना निदेशक उमाशंकर सिंह ने पूरे प्रदेश के लगभग चार हजार शिक्षकों के अलावा डीईओ, डीएसई, बीईईओ से ऑनलाइन बात करते हुए डीजी साथ कार्यक्रम की उपलब्धि एवं चुनौतियों के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा की।
पाकुड़ के एस आर पी दिलीप कुमार राय, शशिकपूर साहा ने बताया कि इस राज्य स्तरीय वेबीनार में है जेईपीसी के पदाधिकारी के अलावे बीसीजी, पीरामल फाउंडेशन , युनीसेफ एवं अन्य स्टेकहोल्डर मौजूद थे। पूरे राज्य से लगभग 4000 शिक्षकों ने जूम ऐप के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भाग लिया ।
पाकुड़ जिले से भी दर्जनों शिक्षकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एसपीडी सर के निर्देशों को सुना। इसमें कहा गया कि डीजी साथ कार्यक्रम सिर्फ लॉक डाउन में ही नहीं बल्कि पूरे सत्र में चलेगा। अभी तक पूरे राज्य से लगभग 10 लाख से अधिक छात्र व अभिभावक इससे जुड़े हुए हैं जिसे 20 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वही निदेशक ने कहा कि हर दिन राज्य स्तर से भेजे जा रहे लर्निंग मैटेरियल समय पर बच्चों तक पहुंचे एवं बच्चों से इस संबंध में फीडबैक लिया जाए कि बच्चे लाभन्वित हो रहे हैं या नहीं। पूरे राज्य में लगभग 45 हजार विद्यालय है जिसमें लगभग सात हजार विद्यालय शैडो जोन में हैं जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है। अधिक से अधिक बच्चों को वाटस्एप से जुड़े इसकी जवाबदेही सिर्फ प्रधानाध्यापक कि नहीं बल्कि विद्यालय के सभी शिक्षकों का है । अगर सभी शिक्षक पोषक क्षेत्र का निर्धारण कर कार्य करेंगे तो हम बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। वहीं उन्होंने कहा कि नेशनल चैनल के माध्यम से भी 10:00 से 2:00 तक ऑनलाइन क्लासेस की व्यवस्था है जिसे देख कर आसानी से कंटेंट को समझ सकते हैं बच्चों को जहां भी परेशानी हो शिक्षकों से पूछ सकते हैं। उन्होंने बताया कि डीजी साथ के अलावा डीडी नेशनल एवं यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी बच्चों को कंटेंट उपलब्ध कराया जा रहा है ।शिक्षक अगर चाहें तो बच्चों को शेयरिंग क्लासेस के माध्यम से अधिक लाभ पहुंचा सकते हैं। डीजी साथ के कंटेंट को तैयार करने के लिए पूरे प्रदेश से 25 से 30 शिक्षकों की टीम दिन रात काम कर रही है एवं बच्चों के अनुसार क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए पठन-पाठन सामग्री तैयार हो रही है । जेईपीसी के गुणवत्त शिक्षा प्रभारी डा अभिनव ने कहा कि हर दिन तीन लाख बच्चे देख रहें हैं लेकिन हर शनिवारइनके क्वीज में लगभग एक लाख बच्चे ही भाग ले रहे हैं शिक्षक प्रयास करें कि उनके विद्यालय के बच्चे भी क्वीज में भाग लें। वहीं बीसीजी के स्टेट हेड सीमा बंसल ने कहा कि अन्य सभी राज्यों से झारखंड बेहतर प्रदर्शन कर रहा है अगर शिक्षक और ध्यान दें तो एक कीर्तीमान स्थापित कर सकते हैं।
पीरामल फाउंडेशन के शोकत राय ने कहा कि राज्य में एक लाख से अधिक शिक्षकों में से तीस हजार शिक्षक ही कंटेंट को देखते हैं। बड़े स्कूलों में कम-से-कम 40 प्रतिशत बच्चों को जोड़ने का प्रयास करें। प्रतिपुष्टि एवं फिडबैक फार्म सभी शिक्षकों को भरना है। यूनिसेफ के प्रतिनिधि पारुल राय ने भी अपने विचार व्यक्त किए।