भूमि को मिलना चाहिए मालिकाना हक : विनोद

विस्थापितों ने श्रीनगर में किया आम सभा
बरही से बिपिन बिहारी पाण्डेय

बरही (हजारीबाग) : सरकार की महत्वकांक्षी परियोजना तिलैया जलाशय के निर्माण के समय वर्ष 1951 – 52 में 56 मौजा के रैयतों की रैयत जमीन तिलैया जलाशय में डूब गई थी। इसके एवज में सरकार व डीवीसी द्वारा भूमि दिया गया किंतु उन्हें भूमि का मालिकाना हक अब तक नहीं दिया गया। डीवीसी द्वारा विस्थापित श्रीनगर गांव के ग्रामीणों ने रविवार को वृहत स्तर पर बैठक किया। बैठक की अध्यक्षता संघर्ष समिति के सुरेन्द्र यादव ने किया। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में झामुमो के केंद्रीय समिति सदस्य सह बरही विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी विनोद विश्वकर्मा उपस्थित हुए। श्रीनगर के ग्रामीणों ने डीवीसी द्वारा विस्थापित 56 मौजा के प्रभावित रैयतों को पूर्णवास के लिए दिए गए भूमि पर मालिकाना हक दिलाने का बात को रखा। इस बाबत विनोद विश्वकर्मा ने संबोधन में कहा कि विस्थापित रैयतों को पुर्नवास के लिए भूमि देकर श्रीनगर में बसाया था। आज इन विस्थापित परिवार को भूमि का मालिकाना हक नहीं मिलना काफी दुखद है। विस्थापितों के साथ छल किया गया है। विस्थापितों को प्राप्त भूमि का मालिकाना हक हर हाल में मिलना चाहिए। क्योंकि भूमि का मालिकाना हक नहीं मिलने के कारण यहां के लोगों का जाति – आवासीय प्रमाण पत्र तक नहीं बन पा रहा है। विनोद विश्वकर्मा ने प्रभावित ग्रामीणों को कहा कि जल्द ही वे लोग एक शिष्टमंडल तैयार करें। ग्रामीणों का शिष्टमंडल के साथ वे संबंधित विभाग के पदाधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री से भेंट करेंगे ताकि इस समस्या का निदान जल्द हो सके। बैठक में वरिष्ठ नेता गयूर अली, महादेव यादव, असरफ अली ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पुर्नवास किये गए सभी रैयतों को हर हाल में मालिकाना हक मिलनी चाहिए। गणेश कुमार यादव, गोपी यादव, प्रयाग यादव, नुनु यादव, रामाश्रय यादव, लालधारी यादव, सरजू यादव, बालेश्वर चौधरी, रामचंद्र ठाकुर, विष्णु यादव, छोटेलाल यादव, जगन्नाथ यादव,द्वारिका यादव, रामप्रवेश यादव, कृष्ण मोहन यादव, बलेश्वर यादव, ईश्वर यादव, रमजान मियां, अजीत शर्मा, रंजीत यादव, विनोद ठाकुर, साबिर अंसारी, वासुदेव रविदास, सुरेश भुईयां,गफूर अंसारी, गोविंद ठाकुर, पंकज यादव, रामचंद्र यादव, रंजीत यादव रमजान मियां, बालेश्वर यादव, ब्रह्मदेव ठाकुर, रमन यादव, इंद्रदेव राम, अशोक यादव, कालीचरण यादव, सैकड़ों रैयत ग्रामीण शामिल हुए।