चाईबासा विधायक दीपक बिरुवा ने उठाए सदन में कई सवाल

विधायक बिरुवा ने विधानसभा में उठाया पर्यावरण स्वीकृति के बिना बनाया गया है झारखंड विधानसभा का नवनिर्मित भवन

नवनिर्मित झारखण्ड विधानसभा भवन समेत दो भवनों के निर्माण में पर्यावरण नियम का उल्लंघन

एनजीटी ने लगाया है 113 करोड़ का जुर्माना
रामगोपाल जेना
चाईबासा। चाईबासा के माननीय विधायक दीपक बिरुवा द्वारा विधानसभा सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को सदन में सवाल उठाया कि एनजीटी की पूर्वी बेंच कोलकाता ने वर्चुअल सुनवाई करते हुए झारखंड के नये विधानसभा भवन और निर्माणाधीन हाईकोर्ट भवन में पर्यावरण नियम का उल्लंघन करने के आलोक में 113 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है तथा 19अन्य भवन के निर्माण को भी पर्यावरण अनुकूल नहीं मानते हुए चिन्हित किया गया है।

इस पर विभाग द्वारा आंशिक स्वीकारात्मक जवाब देते हुए बताया गया कि एनजीटी नयी दिल्ली द्वारा झारखंड के नये विधानसभा भवन और हाईकोर्ट के निर्माण कार्य शुरू होने से पूर्व पर्यावरण अनापत्ति पत्र प्राप्त नहीं किए जाने के कारण सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा 31-12-2019 तक के लिए आकलित पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि 130 करोड़ रुपए की भरपाई करने का निर्देश दिया गया है, वहीं विभाग ने शेष अन्य 19 भवन के मामले में भवन निर्माण विभाग से संबंधित नहीं होने की बात कही गई।

विधायक दीपक बिरुवा ने सवाल उठाया कि ट्रिब्यूनल द्वारा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पर्यावरण नुकसान की भरपाई के लिए विधानसभा भवन पर 47 करोड़ और हाईकोर्ट के नये भवन पर 66 करोड़ रुपए जुर्माना की अनुशंसा की गई है।

इस पर विभाग द्वारा बताया गया कि सेंट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा निर्माणाधीन उच्च न्यायालय भवन में इन्वायरोमेंट क्लियरेंस में विलंब के लिए कार्य आरंभ करने की माह जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2019 तक के लिए प्रतिदिन 56,250 रुपए की दर से 1434 दिन के लिए कुल राशि 81 करोड़ रुपए का प्रर्यावरण क्षतिपूरक राशि की गणना की गई है।
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय भवन का निर्माण कार्य अक्तूबर 2018 से ही बंद है। इसकी सूचना SEIAA को दे दी गई है। फिर भी CPCB द्वारा 31-12-2019 तक के लिए प्रर्यावरण क्षतिपूरक राशि की गणना की गई है।
इसी तरह नवनिर्मित झारखंड विधानसभा भवन के निर्माण कार्य शुरू करने की तिथि 25-01-2016 से पर्यावरण अनापत्ति प्राप्त करने की तिथि 04-09-2019 कुल 1317 दिन के विलंब के लिए प्रतिदिन 37,500 रुपए की दर से कुल 49 करोड़ रुपए पर्यावरण क्षतिपूर्ति की गणना CPCB द्वारा की जा चुकी है।

चाईबासा विधायक दीपक बिरुवा ने सवाल उठाया कि क्या यह बात सही है कि जरुरी पर्यावरण स्वीकृति के बिना ही उक्त भवनों का निर्माण कराया गया है।
इस पर विभाग द्वारा बताया गया कि नवनिर्मित झारखंड विधानसभा भवन और निर्माणाधीन झारखंड उच्च न्यायालय भवन में EC प्राप्त करने में क्रमशः 1317 एवं 1434 दिन का विलंब दर्शाया गया है, जबकि विभाग द्वारा EC हेतु आवेदन 11सितंबर2017 को ही किया जा चुका था। अब तक कभी भी NGT, SEIAAया MOEF & CC द्वारा उक्त भवनों में कार्य रोकने व स्थगित करने का निर्देश भवन निर्माण विभाग को नहीं दिया गया है।

विधायक दीपक बिरुवा ने कहा कि प्रश्नो के उतर स्वीकारात्मक है तो उक्त वर्णित भवनों के पर्यावरण नियमों की अनदेखी कर निर्माण किए जाने के विरुद्ध दोषी विभागीय पदाधिकारियों, एजेंसी एवं संवेदक को चिन्हित कर विधि सम्मत कार्रवाई करते हुए जुर्माना वसूला जाना चाहिए।
इस बाबत विभाग ने बताया कि उक्त दोनों भवनों के पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि की गणना CPCB द्वारा की गई है। विभाग द्वारा बताया गया कि विभाग ने नये झारखंड विधानसभा भवन निर्माण हेतु GRDAएवं Consultant Engineering Services के साथ किए गए एकरारनामा के कंडिकाओ के अनुसार उक्त कंसल्टेंट दर्शाया उल्लंघन किया गया है।
इसी तरह निर्माणाधीन उच्च न्यायालय भवन निर्माण हेतु भवन निर्माण विभाग एवं कंसल्टेंट M/S Enarch consultant Pvt. Ltd के बीच किए गए एकरारनामा की कंडिका 3.1.3 के अनुरूप सभी वैधानिक अनापत्ति पत्र कंसल्टेंट दर्शाया प्राप्त किया जाना था। लेकिन EC न लेकर कंसल्टेंट द्वारा उल्लंघन किया गया है।

आयुष चिकित्सकों की सेवानिवृति उम्र सीमा बढ़ाने की मांग रखी

इसके अलावा झामुमो विधायक दीपक बिरुवा ने झारखंड राज्य में आयुष चिकित्सकों सहित एलोपैथ प्रक्षेत्र एवं दंत चिकित्सकों की वार्धक्य सेवानिवृत्ति की उम्र सीमा 60 से 67 या 65 करने की मांग की।