आओ अपनी भूल सुधारें, पर्यावरण का रूप सुधारें

पलामू से सुधीर कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

मेदिनीनगर: छतरपुर में आयोजित वन महोत्सव सह वृक्षारोपण कार्यक्रम में प्रकृति प्रेमियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।वन विभाग ने इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधायक श्रीमति पुष्पा देवी व विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व सांसद व पलामू भाजपा नेता मनोज कुमार को आमंत्रित किया था।श्रीमति पुष्पा देवी ने अपने संबोधन में वृक्षों की महत्ता बताते हुए कहा कि हमे इनको अपने बच्चों जैसा पालने की जरूरत है।पूर्व सांसद व पलामू भाजपा नेता मनोज कुमार ने विस्तृत रूप से जंगल के महत्व को बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा किहम सभी ये जानते हैं कि हमारे द्वारा काटे गए वृक्षों पर नाना प्रकार के पक्षियों का बसेरा होता है। शाखाओं, पत्तों, जड़ों एवं तनों पर अनेक कीट-पतंगों, परजीवी अपना जीवन जीते है एवं बेतहाशा वनों की कटाई से नष्ट हुए प्राकृतावास के कारण कई वन्य प्राणी लुप्त हो गए एवं अनेक विलोपन के कगार पर हैं। भूमि के कटाव को रोकने में वृक्ष-जड़ें ही हमारी मदद करती हैं। वर्षा की तेज बूंदों के सीधे जमीनी टकराव को पेड़ों के पत्ते स्वयं पर झेलकर बूंदों की मारक क्षमता को लगभग शून्य कर देते हैं। इसी विचार से वन महोत्सव जुलाई के पहले दूसरे सप्ताह में मनाया जाता है ।भारत में एक वार्षिक पेड़ लगाकर वन महोत्सव त्योहार मनाया जाता है ।
पूर्व सांसद ने वृक्षो के महत्व को बताते हुए कहा कि लाखों पौधे वन महोत्सव सप्ताह में पूरे भारत भर में लगाए जाता हैं । कार्यालयों , स्कूलों , कॉलेजों आदि में जागरूकता अभियान विभिन्न स्तरों पर आयोजित की जाती हैं ।वन-महोत्सव त्योहार के दौरान पेड़ों का रोपण, वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराने जैसे विभिन्न प्रयोजनों के कार्य करता है। खाद्य संसाधनों के उत्पादन में वृद्धि , मवेशियों के लिए भोजन उपलब्ध कराने , उत्पादकता बढ़ाने के लिए खेतों के चारों ओर आश्रय बेल्ट बनाने में मदद करता है। छाया और सजावटी परिदृश्य प्रदान करता है। मिट्टी गिरावट संरक्षण में मदद करता है । वृक्ष ग्लोबल वार्मिंग को रोकने और प्रदूषण को कम करने के लिए सबसे अच्छा उपाय प्रदान करता है।
जंगल से प्राप्त लकड़ी हमारे शैशव के पालने (झूले) से लेकर महाप्रयाग की यात्रा की साथी है। अन्य वनोपज भी हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हम स्वयं को वनों से अलग नहीं कर सकते।मानव सभ्यता का प्रारंभ जंगलों, कंदराओं, गुफाओं, पहाड़ियों, झरनों से ही हुआ है। विकास की इस दौड़ में हम आज कंक्रीट के जंगल तक आ पहुंचे हैं।वर्तमान स्थिति यहां तक आ पहुंची है कि हमने अपने विकास और स्वार्थ के लिए वनों को काट-काटकर स्वयं अपने लिए ही विषम स्थिति पैदा कर ली है। अंधाधुंध होने वाली कटाई से जो दुष्परिणाम हमारे सामने आ रहे हैं, वे भी कम चौंकाने वाले नहीं हैं । इसकी कल्पनामात्र से ही सिहरन हो उठती है। घटता-बढ़ता तापमान, आंधी, तूफान, बाढ़, सूखा, भूमिक्षरण, जैसी विभिषिकाओं से जूझता मानव कदाचित अब वनों के महत्व को समझने लगा है।तभी वनों के संरक्षण की दिशा में सोच बढ़ा है। व्यावहारिक रूप से यह उचित भी है और समय की मांग भी यही है। वनों को विनाश से बचाने एवं वृक्षारोपण योजना को वन-महोत्सव का नाम देकर अधिक-से-अधिक लोगों को इससे जोड़कर भू-आवरण को वनों से आच्छादित करना एक अच्छा नया प्रयास है।वन-महोत्सव सामान्यतः जुलाई-अगस्त माह में मनाकर अधिक-से-अधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प ले।सरकारी प्रयास के अलावा हम सभी ये संकल्प ले कि इसे हम निजी अभियान बनाएं।इस मौके पर डिस्टिक फॉरेस्ट ऑफिसर पलामू, सर्किल ऑफिसर छतरपुर, एसीपी छतरपुर, मंडल अध्यक्ष रामनरेश यादव, अशोक भुइयां, सुदामा प्रसाद, संतोष गुप्ता, नसरुल्ला अंसारी, जितेंद प्रसाद गुप्ता, विश्वनाथ सिंह,रामदुलारी देवी मुखिया, रविन्द्र राम, मनोज कुमार गुप्ता, अशोक तिवारी, संजय सिंह, विनय सिंह इत्यादि कार्यकर्ता और प्रकृति प्रेमी मौजूद थे।