सावित्री पूजा के लिए लगी महिलाओं की भीड़, सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी घज्जियां

पलामू से सुधीर कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

मेदिनीनगर: वट सावित्री पूजा के लिए पलामूवासी कोरोना संकट को भूल गये. और पूजा-अर्चना के नाम पर सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल नहीं रखा गया. कोरोना (कोविड-19) संक्रमण के बीच गुरुवार को बड़ी संख्या में महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा की और अपने पतियों के दीर्घायु और उनकी कुशलता की कामना की.अधिकतर पूजा स्थलों पर महिलाएं सोशल डिस्टेंसिंग की घज्जियां उड़ाती दिखी।
क्या है पूजा की मान्यता?
ऐसी मान्यता है कि वट सावित्री व्रत कथा के सुनने मात्र से महिलाओं के पति पर आने वाली बुरी बला टल जाती है. बरगद का पेड़ चिरायु होता है. और इसे दीर्घायु का प्रतीक मानकर परिवार के लिए इसकी पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन ही माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और श्रद्धा से यमराज द्वारा अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे.इसलिए इस व्रत का महिलाओं के बीच विशेष महत्व बताया जाता है. महिलाएं भी इसी संकल्प के साथ अपने पति की आयु और प्राण रक्षा के लिए व्रत रखकर पूरे विधि विधान से पूजा करती हैं. इस दिन वट (बड़, बरगद) का पूजन होता है. इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं।

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