ईसीएल के बंद पड़े खदान के समीप भूधसान ग्रामीण सड़क अवरूद्ध

जामताड़ा से राजकिशोर सिंह की रिपोर्ट

जामताड़ा : जिला के नाला थाना क्षेत्र में भू.धसान होने से परिहारपुर गॉव में आवागमन बाधित हो गई है। ज्ञात हो कि नाला थाना क्षेत्र स्थित ईसीएल के बंद पड़े कोयला खदान के परिहारपुर गांव से महज 200 फीट दूर महावीर मंदिर के निकट सौ फीट की परिधि में डेढ़ सौ फीट गहरा भू.धसान हो गया। ठीक इसी क्षण उससे कुछ ही दूर पर पलास्थली रेलवे स्टेशन के दक्षिण दिशा स्थित पलास्थली.विद्यापीठ के निकट भी लगभग 60 फीट परिधि में दूसरा भू.धसान भी हुआ है जो कि डेढ़ सौ फीट गहरा खाई बन गया है। इस हादसा से गांव की एकमात्र सड़क भी जमींदोज हो गई है। जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। जानलेवा भू.धसान से भले ही किसी जान माल का नुकसान नहीं हुआ है लेकिन गांव में सड़क के अभाव में आवागमन पूर्ण रुप से बाधित हो गया। फिलहाल गांव से बाहर जाने के लिए वैकल्पिक सड़क नहीं है । ऐसी स्थिति में जान जोखिम में डालकर वे भू.धसान स्थल के पास से ही झाड़ी जंगल होकर आरपार करने लगे हैं। इस वारे में ग्रामीण सुनील माजि ने बताया कि बुधवार शाम करीब सात बजे सीएससी केंद्र बंद कर गांव परिहारपुर लौट रहे था। जैसे ही परिहारपुर गांव के महावीर मंदिर के निकट पहूंचते ही एक भयंकर आवाज सुनाई दी। कहा कि आवाज इतनी भयानक थी कि शरीर कांप उठा। चारों ओर धूल.मिट्टी उड़ने लगी थी। हिम्मत करके उसने दूर से ही भू.धसान स्थल का नजारा देखा तथा गॉव के लोगो को इस घटना के बारे में जानकारी दिया। आलम यह है कि गांव का एक दिशा अजय नदी से घिरा हुआ है तो दूसरे दिशा में जानलेवा खदान। भला गांव के लोग करे तो क्या करें इसबार दो दो जगह में भूस्खलन होने से गांव के लोगों को आवाजाही करने में कठिनाई हो रही है। तथा गॉव के लोगो में भय का महौल बना हुआ है। लगभग 22 साल पहले ईसीएल ने पलास्थली.कास्ता क्षेत्र में कोयले का उत्खनन बंद किया है। तब से यह स्थल लावारिस जैसा पड़ा हुआ है। इतना ही नहीं ईसीएल का जॉनल ऑफिस पांडेश्वर जो पं0 बंगाल में होने के कारण निगरानी भी कम होने लगी। हॉलाकिं समय समय पर ईसीएल प्रबंधन जामताड़ा जिला प्रशासन वन विभाग एवं खनन विभाग के द्वारा अवैध खदान को मिट्टी से भरने का काम किया गया है। लेकिन अब भी सैंकड़ो खदान अवैध सेवा देने के लिए तैयार है । यहां की यातायात व्यवस्था के संबंध में दिनू माजी केलु बाउरी एवं निताय मंडल ने बताया कि लगभग 15 साल पहले भू.धसान के कारण सरकारी रास्ता जमींदोज हो गया है। बाद में दो.दो बार नया सड़क ग्रामीणों के द्वारा बनाया गया वह भी खदान के कोख में समा गया है। प्रशासन या किसी भी दिशा से सहयोग नहीं मिलने के कारण इसबार भी ग्रामीण चंदा इकट्ठा कर फिर से सड़क बनाने की तैयारी में जुट गए हैं।