एक ऐसा गाँव जहाँ 200 वर्षों से भी ज्यादा समय से होली नही मनायी जाती, जानिये होली का नाम सुनते ही क्यों ख़ौफ़ज़दा हो जाते है लोग

बोकारो से जय सिन्हा
बोकारो:बोकारो ज़िला मुख्यालय से करीब 25 किलो मीटर कसमार प्रखंड का एक गाँव है दुर्गापुर यहाँ की आबादी एक हज़ार से 1200 के करीब है। इस गाँव मे घुसते ही सरकार द्वारा फैलाई गई विकास की रौशनी तो आपको सहज ही दिख जाएगी। यहाँ के लोग शिक्षित भी हो रहे है। यहां के लोग पानी बिजली घरेलू गैस के अलावा इंटरनेट का जहाँ भरपुर उपयोग करते है वही अपनी माली हालत के क्षमतानुसार आधुनिक सुख सुविधाओं उपयोग भी कर रहे है। इस गाँव के युवा उच्च शिक्षा ग्रहण करने बाहर के प्रदेशो की ओर भी रुख करते है। लेकिन इनसब के बाबजूद इस गाँव की बिडम्बना यह है कि इस गांव को अंधविश्वास ने वर्षों से बुरी तरह जकड़ रखा है। दुर्गापुर गाँव की महिला हो या पुरूष युवा हो या बुजुर्ग सभी पर अंधविश्वास का साया इस तरह छाया हुआ है कि ये रंगों का त्योहार होली मनाने से डरते है। होली का नाम सुनते ही इनके ज़ेहन में एक अज्ञात ख़ौफ़ घर कर जाता है। इस बाबत जब हमने 25 वर्षीय मंटू महतो से बात की तो उसने साफ कहा कि वो अपने जीवन मे कभी होली देखा ही नही। वही गांव के ही रविशंकर से जब हमने बातो हो बातों में होली नही खेलने के कारणों को जानना चाहा तो उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने बताया है कि गांव के पास स्तिथ पहाड़ी पर बाबा बड़राव का वास है उन्हें रंगों से नफरत था उन्होंने ही उस वक़्त के राजा से कहा था कि इस गाँव के लोग होली ना खेले, लेकिन वर्षो गुजरने के बाद गाँव के कुछ लोगों ने गांव में होली खेली तो हमारे गाँव को कई प्राकृतिक आपदा के शिकार होना पड़ा। पशुओं से शुरू हुआ मौत का शिलशिला इंसानो पर जाकर थमा। ग्रमीणों का ऐसा मानना है राजा ने भी ऐसी ही गलती की थी तो होली के दिन ही उनकी मौत हो गई थी।
ग्रामीण कमलेश कुमार ने बताया कि इसी अज्ञात डर की बजह से 200 वर्षोँ से ज्यादा समय से हमारे गाँव मे होली नही मनाया जाता है।
वही जब हमने दूसरे गाँव से इस गाँव मे व्याही गई महिलाओ से बात की तो उन्होंने साफ कहा कि जब वो मैके में थी तब होली खेला करती थी लेकिन व्याह के बाद से इस गाँव की परंपरा का निर्वाहन कर रही हूँ।
लेकिन अब गौर करने वाली बात यह है कि जिस गाँव के युवा खुलेआम इंटरनेट के माध्यम गूगल की दुनिया मे जाकर ब्रहांड की जानकारी इक्क्ठा कर रहे हो लेकिन अंधविश्वास में जकड़े अपने गाँव के लोगो को अबतक बाहर नही निकल पाए हो ये कैसी बिडम्बना है। इधर राज्य सरकार ने तो विकास की भरपूर रोशनी बिखेरी है लेकिन अब वक्त का तकाजा है कि इस गाँव मे विशेष अभियान चलाकर इन गाँव वालों को अंधविश्वास के चक्रभियु से बाहर निकलना होगा, क्योकि होली से जुड़े अंधविश्वास तो समाज के सामने आ गया है, लेकिन ना जाने ऐसेही और कई अंधविश्वास इन ग्रमीणों को जकड़ रखा हो जिनका खुलासा होने भी ज़रूरी है।

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