पर्यावरणविद कौशल के निःशुल्क पौधारोपण कार्य सराहनीय है : आयुक्त

पर्यावरणविद ने आयुक्त के साथ उनके आवासीय परिसर में डॉक्टर दिवस पर देश विदेश के विलुप्त हो रहे कई प्रजाति के पौधे लगाए

– नेपाल से  रुद्राक्ष ,भूटान से कल्पतरूई व सिंदूर ,कर्नाटक से सफेद चंदन, उड़ीसा से हरे ऑस्ट्रेलिया का बैर और हिमाचल से कपूर का हुआ पौधरोपण

पलामू से सुधीर कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

मेदिनीनगरः विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पर्यावरण धर्मगुरु व वन राखी मूवमेंट के प्रणेता पर्यावरणविद कौशल किशोर जायसवाल ने  डॉक्टर दिवस  पर प्रमंडलीय आयुक्त  जटाशंकर चौधरी के  आवासीय परिसर में  उनके साथ विश्व में विलुप्त हो रहे  पौधों को विदेश से  मंगवा कर लगाया गया।
पर्यावरण धर्मगुरु कौशल ने कहा है कि विश्व में जिस प्रकार डायनासोर , चिल,  कांडर समेत  बहुत से ऐसी कई  पक्षी विलुप्त हो गए।  जिसके कारण बहुत से पेड़ों का बीजों का प्रजनन बढ़ना रुक गया।  जिसके कारण कई तरह के नई- नई बीमारियां भी पैदा होने लगे क्योंकि पेड़ कई तरह के बीमारियों का  वाईरस को मारता है।  पेड़ों की कटाई होने से उनकी संख्या भी कम होती जा रही है। वहीं पेड़ों की संख्या बढ़ाने वाले चिड़िया इस आधुनिक युग तरंग और प्रदूषण के कारण समाप्त हो गए।  यही कारण है कि आज  नेपाल से रुद्राक्ष, भूटान से कल्पतरु और सिंदूर, ऑस्ट्रेलिया का  बारहमासी बैर ,उड़ीसा से हरे, कर्नाटक से सफेद चंदन, हिमाचल से कपूर ,उत्तर प्रदेश के बारहमासी अमरूद, और तमिल नाडु से बारहमासी आम के पौधे मंगा कर आयुक्त के  आवासीय परिसर  में  धरती माँ को सुपुर्द किया गया। जिस पौधों को आयुक्त के आवासीय परिसर में लगाया गया वे सभी प्रजाति के पौधे अब विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए।
आयुक्त  जटाशंकर चौधरी ने पर्यावरणविद कौशल किशोर जायसवाल की लंबे अरसे से निशुल्क पौधा वितरण,  रोपण , वनों पर रक्षाबंधन,  पर्यावरण धर्म  की गोष्टी जैसे संचालित अभियान   की भूरी- भूरी प्रशंसा  की । उन्होंने यह भी  कहा कि पर्यावरण  और प्रकृति की सेवा से ही हम और आने वाले पीढ़ी को स्वस्थ रखने में कामयाब हो सकेंगे।  उन्होंने कहा कि जिस प्रजाति के पेड़  विलुप्त होते जा रहे हैं उस प्रजाति के पौधा लगाना अति आवश्यक है । क्योंकि आने वाले पीढ़ी  केलिए वह दर्शनीय होगा। विलुप्त हो रहे पेड़ों की प्रजाति के पौधे को कौशल किशोर द्वारा पुनः लगाना पर्यावरण के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य है।
राखी मूवमेंट के प्रणेता कौशल ने कहा है कि यदि प्रकृति और ब्रह्मांड के 84 लाख  योनि जीवों को और नई बीमारियों से मुक्त दिलाना है तो विश्व के सभी  बच्चे से  बुढ़े तक को अपना धर्म के साथ पर्यावरण धर्म के 8 मूल ज्ञान मंत्रों को अपनाना होगा । तभी हम और आने वाले पीढ़ी को बचा पाएंगे। इस पुनीत कार्य के मौके पर उपस्थित  प्रमुख लोगों में सीटीचियांकी कृषि विज्ञान अनुसंधान केंद्र के सह निदेशक डॉक्टर देवेंद्र नारायण सिंह,  इंजीनियर प्रमोद कुमार , प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के जयंत कुमार,  शिव शंकर प्रसाद, राणा सिंह, दुर्गेश कुमार, ईश्वरी महतो आदि शामिल थे।