विस्थापितों पर ट्रांस्पोर्टरों द्वारा किया जा रहा शोषण, फिर चुप क्यों है प्रबंधन व प्रशासन: आशुतोष

सीसीएल प्रबंधन से स्थगित बंदी पर वर्चुअल बैठक कर समस्या समाधान की माँग
विस्थापित गाँव में खाद्यय सामग्री, सेनिटायज, मास्क, एवं करोना जाँच की व्यस्था करें प्रबंधन
टंडवा।आम्रपाली परियोजना क्षेत्र के ग्रामीणों से आधारित विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोर्चा के द्वारा महाप्रबंधक आम्रपाली,चन्द्रगुप्त परियोजना क्षेत्र को एक पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि 11 मई से ग्रामीणों के द्वारा आहूत बंदी सीसीएल एवं महाप्रबंधक आम्रपाली के आग्रह पर स्थगित कर दी गयी थी।जिसके आलोक में अतिशीघ्र मोबाइल वर्चुअल ऐप के माध्यम से चार सूत्री मांगों पर वार्ता कर समस्या का समाधान करने का आग्रह किया है। वहीं चार सूत्री मांगों से अलग ग्रामीणों के द्वारा मांग किया गया है कि दो नंबर काटा व ग्यारह नंबर काटा को बंद कर दिए जाने के कारण आम्रपाली के विस्थापित प्रभावित परिवार को ट्रक चलाने में समस्या उत्पन्न हो रही है। इन समस्याओं को देखते हुए डंप के समीप दो कांटा ट्रक परिचालन के लिए स्थापित की जाए या फिर स्थापित कांटों से ही उन्हें निर्गत किया जाए, वहीं विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोर्चा ने मांग किया है कि कोविड महामारी की भयावह स्थिति को देखते हुए सरकारी गाइडलाइन और पाबंदी को देखते हुए पांच गांव के विस्थापित गरीब परिवार को खाद्य सामग्री सेनीटाइज व जांच की व्यवस्था की जाये। साथ ही पांचों गांवों को सैनिटाइज अच्छे तरीके से किया जाए, आगे ग्रामीणों ने आग्रह किया है कि लोकल सेल कांटाओं के माध्यम से रोज पच्पन सौ से छः हजार टन कोयले की ढुलाई ट्रक के माध्यम से हो रही है लेकिन विस्थापित परिवार की ट्रक घर की शोभा बनकर रह गयी है। जो कि बहुत ही पीड़ादायक है। बाहरी लीप्टर और शिफ्टर के द्वारा विस्थापित परिवार के ट्रक मालिकों को फॉर्मेट ना देकर के शोषण की प्रकाष्ठा को पार कर दिया गया है। जिससे विस्थापित परिवार काफी आक्रोशित है महोदय से आग्रह है कि यथाशीघ्र लिप्टरों सिप्टरों और ट्रांसपोर्टरों के दादागिरी को समाप्त करते हुए लोकल ट्रक आनरों को फॉर्मेट की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए, अंत में ग्रामीणों ने कहा है कि गांव के समीप हैवी ब्लास्टिंग के कारण पानी का स्तोत्र काफी नीचे चला गया है। जिस वजह से चांपानल एवं सीसीएल के द्वारा करवाई गई डीप बोरिंग भी फेल हो चुकी है जिससे पेय जल संकट उत्पन्न हो चुकी है। महोदय से आग्रह है कि यथाशीघ्र विस्थापित परिवार को पेयजल की व्यवस्था करवाई जाये।विस्थापितों के नेता आशुतोष मिश्रा ने कहा कि जल जंगल घर द्वार सब कुछ राष्ट्र के नाम पर समर्पित कर देने वाले विस्थापित परिवार की पीड़ा असहनीय है, ट्रांसपोर्टरों के द्वारा विस्थापित ट्रक ओनर का दोहन शोषण किया जा रहा है, जिन्हें पलकों पर बिठाना चाहिए उन्हें गुलाम बनाने का प्रयास किया जा रहा है, ट्रांसपोर्टरों के द्वारा बिना रोजगार मुहैया कराए हुए लाखों टन कोयला का डिस्पैच किया जा रहा है, आखिर इतनी समस्याओं से जूझ रहे हैं आम्रपाली के जल जंगल जमीन घर द्वार देने वाले विस्थापित परिवार फिर भी प्रबंधन और प्रशासन चुप क्यों हैं।