किसानों को धान की खेती का दिया गया प्रशिक्षण

गोड्डा: ग्रामीण विकास ट्रस्ट-कृषि विज्ञान केंद्र, गोड्डा के सभागार में बोआरीजोर प्रखंड के ग्राम-अम्बा तथा पोड़ैयाहाट प्रखंड के ग्राम-बेलतुप्पा के प्रगतिशील किसानों को धान की खेती का प्रशिक्षण दिया गया। वरीय वैज्ञानिक-सह-प्रधान डाॅ रविशंकर ने बताया कि जिला के आदिवासी किसान भाई मुख्य रूप से ऊपरी एवं मध्यम जमीन में धान की खेती करने के लिए देसी तथा लम्बी अवधि की प्रजातियों का चयन और सघन रोपाई करते हैं।
जिससे कि पौधे की बढ़ोतरी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा रोग-कीट का प्रकोप भी बढ़ जाता है। जिससे धान की उपज में भारी गिरावट आती है। इसलिए किसान भाइयों को कम अवधि में तैयार होने वाली तथा सूखा सहन करने की क्षमता वाली धान की किस्म का चयन करने के लिए जोर दिया।
सस्य वैज्ञानिक डाॅ अमितेश कुमार सिंह ने धान की उन्नत प्रजाति सहभागी एवं राजेन्द्र श्वेता की नर्सरी तैयार करने की विधि बताई । कहा कि 18-21 दिन में तैयार बिचड़े की श्री विधि से रोपाई करें। उन्होंने कहा कि सहभागी प्रजाति का धान सूखे के प्रति सहनशील है। सहभागी धान 110-115 दिन में तैयार हो जाता है। इसका पौधा छोटा तथा दाना मध्यम पतला होता है। यह पत्ती फटने की प्रतिरोधी एवं भूरा धब्बा तथा शीथ राॅट के प्रति प्रतिरोधी किस्म है। इसके साथ ही यह पत्ती बेधक तथा तना बेधक के प्रति प्रतिरोधी किस्म है। इसकी उपज 3-4 टन प्रति हेक्टेयर है।
धान की राजेन्द्र श्वेता किस्म मध्यम जमीन के लिए उपयुक्त है। यह किस्म 130 से 140 दिन में तैयार हो जाती है। यह किस्म भी भूरा धब्बा, शीथ राॅट, पत्ती बेधक एवं तना बेधक प्रतिरोधी है। इसकी उपज 4 से 4.5 टन प्रति हेक्टेयर है। धान के बिचड़े को श्री विधि से 2 बिचड़े कतार से कतार में 25 सेंटीमीटर की दूरी में लगाएं जिससे कि खर-पतवार निकालने में आसानी होगी तथा संतुलित मात्रा में रासायनिक खाद का छिड़काव आसानी से कर सकेंगे। किसानों को प्रत्यक्षण हेतु धान की उन्नत प्रजाति सहभागी एवं राजेन्द्र श्वेता के बीज उपलब्ध कराया गया। मौके पर डाॅ प्रगतिका मिश्रा, डाॅ रितेश दुबे, रजनीश प्रसाद राजेश, राकेश रोशन कुमार सिंह, मनोज मुर्मू, जोसफिन किस्कू, सोनोती सोरेन, तालामय टुडू, सोनामुनी मुर्मू, संझली हांसदा, मरांगमय मुर्मू, अलबीना सोरेन समेत 57 आदिवासी किसान बीज प्रत्यक्षण प्रशिक्षण में सम्मिलित हुए।