आजीविका पशु सखी का पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर संपन्न

गोड्डा: ग्रामीण विकास ट्रस्ट-कृषि विज्ञान केंद्र के सभागार में जिला मिशन प्रबंधन इकाई, ग्रामीण विकास विभाग एवं जेएसएलपीएस, गोड्डा, झारखंड सरकार के सौजन्य से आजीविका पशु सखी का पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया। “पशु प्रबंधन एवं पशु पोषण” विषयक पाँच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान पशुपालन वैज्ञानिक डाॅ0 सतीश कुमार ने विश्व पशु कल्याण दिवस के अवसर पर बताया कि व्यवसायिक दृष्टि से गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी, सुअर का पालन अत्यधिक लाभकारी है। पशुओं का पालन-पोषण, आवास प्रबंधन, आहार प्रबंधन एवं नियमित टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है। गाय की दुधारू नस्ल जैसे-साहीवाल, गिर, देवनी, रेड सिंधी आदि के विषय में विस्तारपूर्वक बताया। पशुओं को खुरपका-मुँहपका रोग से बचाने के लिए आवास की नियमित साफ-सफाई होती रहनी चाहिए, जिससे कि पशुओं के खुर में गोबर नहीं लग सके। पशुओं को खुरपका-मुँहपका बीमारी से बचाने के लिए नियमित एफएमडी का टीका लगवाना चाहिए। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बकरी पालन रीढ़ का कार्य करता है, क्योंकि इसके उत्पादित वस्तुएं जैसे दूध, मांस , बाल, चमड़े, जैविक खाद आदि सभी प्रकार से लाभदायक हैं। बकरियों की दुधारू नस्लें जैसे- जखराना, जमुनापारी,सूरती, बीटल, मांस उत्पादन हेतु ब्लैक बंगाल,बरबरी, सिरोही, गंजाम आदि के विषय पर प्रकाश डाला। बरसात के समय बकरियों को छेरा रोग से बचाने के लिए पीपीआर की टीका लगाने की विधि बताई। बकरियों के खान-पान, आवास का प्रबंधन, साफ-सफाई पर विशेष चर्चा किया। चूजों को स्वस्थ रखने के लिए पहली खुराक अंडे से निकलने के 48 घंटे बाद दी जाती है। चूजों के लिए हमेशा साफ पानी का प्रबंध करना चाहिए। गोड्डा में पाये जाने वाले मुर्गी दाना के विभिन्न अवयवों दली हुई पीली मकई, मुंगफली की खल्ली, चावल की कुन्नी, गेंहूँ का चोकर, मछली का चूरा, हड्डी का चूर्ण, बुझा हुआ चूर्ण का मिश्रण तथा नमक का संतुलित मात्रा में समावेश करते हुए मुर्गियों एवं बत्तखों के लिए प्री-स्टार्टर, स्टार्टर, ग्रोवर एवं फिनिशर आहार पशु सखियों के माध्यम से तैयार कराया गया। जेएसएलपीएस को सलाह दी गई कि यदि ग्रामीण स्तर पर इसप्रकार से दाना आहार तैयार कराया जाए तो किसानों को दाना आहार तैयार करने में लागत कम आयेगी और उनकी आय में वृद्धि भी होगी। स्थानीय पशु दाना उत्पादक कालिका प्रसाद महतो का सराहनीय योगदान रहा। सुबबूल, कटहल, सहजन, नेपियर घास, सूडान घास, हाइड्रोपोनिक्स, बरसीम एवं अजोला के उत्पादन पर प्रकाश डाला। वरीय वैज्ञानिक-सह-प्रधान डाॅ0 रविशंकर ने विश्व अंडा दिवस के अवसर पर पशु सखियों से ग्रामीण स्तर पर अंडा सेवन करने तथा अंडे के महत्व के विषय में अत्यधिक प्रसारित करने के लिए आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गोड्डा जिला में दूध, दूध से तैयार उत्पाद जैसे-दही, छाछ, मक्खन, क्रीम, पनीर, छेना तथा मुर्गी,बकरी एवं सुअर के मांस का अच्छा बाजार होने से ग्रामीण किसानों तथा महिलाओं के लिए दूध एवं मांस का बिजनेस आमदनी बढ़ाने का अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन जेएसएलपीएस के कार्यकर्ता सौमित्रा मैती ने किया। प्रशिक्षण के अन्त में सभी आजीविका पशु सखियों को प्रमाण-पत्र, नेपियर तथा कसावा का पौधा वितरित किया गया। स्मिता कुमारी, नूतन देवी, सेरोफिना मरांडी, मुन्नी देवी, छाया कुमारी, मीना सोरेन समेत 30 आजीविका पशु सखियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।