घंटी आधारित अनुबंध सहायक प्राध्यापकों का सत्याग्रह आंदोलन सातवें दिन भी जारी

रांची: राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत घंटी आधारित अनुबंध सहायक प्राध्यापकों द्वारा अपनी माँग हेतु आज सातवें दिन राजभवन के सामने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन जारी रहा!
झारखंड सहायक प्राध्यापक अनुबंध संघ के डाॅ०अवध बिहारी पुराण ने कहा कि वर्तमान सरकार ने पिछले वर्ष प्रतिपक्ष में रहते हुए हम सभी शिक्षकों से वादा किया था कि हमारी सरकार बनने पर आपसबों की माँग पूरी की जायेगी। परंतु आज सरकार न सिर्फ अपने वादों से विमुख हो चुकी है,बल्कि तीन वर्षों तक सेवा लेने के बाद 31 मार्च के बाद हमारी सेवा को ही समाप्त कर रही है। अतः इन शिक्षकों का कहना है कि सरकार के तमाम मंत्रियों को अपने वादे का पालन करना चाहिए।डॉ०के०के०कमलेंदू ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग के संकल्प संख्या-04/वि०-1-135/ 2016-01,दिनांक 01.01.2021 के कंडिका संख्या- 3 (ख) में कर्णांकित घंटी आधारित अनुबंध शिक्षकों के पुनर्चयन हेतु नये पैनल के गठन का निर्देश देने के अलावा इन शिक्षकों को हटाकर नये शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश देकर सरकार ने इनके प्रति कल्याणकारी भूमिका नहीं निभाई है, जबकि राज्य को हमेशा कल्याणकारी संस्था बनकर रहना चाहिए। मुख्यमंत्री नये संकल्प को अविलंब संशोधित करते हुए पूर्व के पैनल (02.03.2017) पर कार्यरत घंटी आधारित अनुबंध सहायक प्राध्यापकों का सम्मान करते हुए निश्चित मासिक मानदेय के साथ 65 वर्षों की आयु तक सेवा विस्तार करें। जो कि इन शिक्षकों की नैसर्गिक व न्यायोचित मांग है। इन्हीं मांगों को लेकर 28 जनवरी से ही घंटी आधारित अनुबंध सहायक प्राध्यापक अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आंदोलन पर बैठे हैं।
आज राजभवन राँची के सामने सत्याग्रह आंदोलन में विभिन्न विश्वविद्यालयों के घंटी आधारित संविदा सहायक प्राध्यापक काफी संख्या में शामिल हुए जिनमें डॉ०रंजीत प्रसाद, , डॉ०श्वेता शर्मा, डॉ०एस०के०झा, डॉ०नम्रता,वाजदा तब्बूसूम डॉ०स्मिता, डॉ०दीपक कुमार,डॉ०सुमंत कुमार, डॉ०साधना कुमारी, डॉ ० सुमिरन कुमार रजक, डॉ०धनंजय कुमार पाठक, डॉ ०अविनाश मोर्य, डॉ०आनंद वर्द्धन,सचिन्नानाद मैथी , डॉ०राजन कुमार , जहांगीर आलम , वरुण तिवारी , देवेंद्र साहू , डॉ श्रवण कुमार तिवारी ,अरविंद पासवान , आदि उपस्थित रहे ।