घंटी आधारित संविदा सहायक प्राध्यापकों का अब तक नहीं हुआ मानदेय का भुगतान

रांची: कोल्हान विश्व विद्दालय में कार्यरत घंटी आधारित संविदा सहायक प्राध्यापकों का मानदेय विगत जनवरी माह से भुगतान नहीं किया गया है।जिसके वजह से इन शिक्षकों में व्यवस्था के प्रति असंतोष पनप रही है।विदित हो कि विश्व विद्दालय के पी०जी०विभाग एवं सभी अंगीभूत महाविद्यालयों में लगभग 200 शिक्षक कार्यरत हैं।इस संदर्भ में झारखंड सहायक प्राध्यापक (अनु०)संघ के प्रदेश संरक्षक सह कोल्हान वि०वि०संघ के अध्यक्ष डॉक्टर एस०के०झा ने बतलाया कि राज्य के कई अन्य वि०वि०में अप्रैल माह तक के मानदेय का भुगतान कर दिया गया है।परंतु कुछ वि०वि०ऐसे हैं जिसने विगत ढाई साल से आजतक कभी भी प्रति माह मानदेय का भुगतान नहीं किया है।उनमें कोल्हान वि०वि०भी एक है।जहाँ शिक्षकों को प्रतिमाह मानदेय मिलना चाहिए वहाँ चार -पाँच माह पर मानदेय भुगतान करने की परम्परा इस विश्व विद्दालय ने बना रखी है।लाकडाउन अवधि का मानदेय विनोबा भावे वि०वि० और डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुर्खजी वि०वि०में भी कर चुका है,परंतु यहाँ उच्च तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग से गाइडलाइन माँगने के नाम पर 18 मार्च से लेकर अब तक बिल भी जमा नहीं करवाया गया है।सीनेट सदस्य सह संघ के संगठन सचिव डॉक्टर के०के०कमलेंदू ने कहा कि इन शिक्षकों ने वि०वि०की शिक्षा में काफी गुणवत्ता पूर्ण परिवर्तन लाया है,लेकिन अफसोस की बात है कि आजतक वि०वि०ने कभी भी समय पर प्रति माह मानदेय का भुगतान नहीं किया है।वि०वि०प्रशासन को इस मुद्दा पर गंभीरता पूर्वक सोचना चाहिए।संघ के सचिव डॉक्टर चंद्राणी सरकार ने कहा कि सामने ईद का पर्व है,महाविद्यालय में ग्रीष्मकालीन अवकाश भी हो गया है,परंतु जनवरी से अबतक मानदेय का भुगतान नहीं होना वि०वि०प्रशासन की उदासीनता को दर्शाता है।लाकडाउन अवधि और कोरोना महामारी के काल में भी वि०वि०प्रशासन में,इन शिक्षकों के प्रति संवेदना नाम की चीज नहीं है।