झारखंड सरकार निजी विद्यालयों के शिक्षक शिक्षिकाओं को भी रोजगार मुहैया कराने पर विचार-विमर्श करें: काजल शंखवार

रजरप्पा: वैश्विक महामारी कोविड-19 के तहत  लॉकडाउन में निजी स्कूलों के शिक्षकों को  मार्च 2020से ही वेतन नहीं मिलने के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। रामगढ़ जिला के गोला प्रखंड निवासी निजी शिक्षिका काजल शंखवार का पूरा परिवार का भरण पोषण पूर्ण रूप से प्रभावित हो गया है । उन्होंने कहा कि लॉकडाउन लागू होते समय सरकारी निर्देश और जारी परिपत्र के अनुसार शिक्षकों को वेतन मिलना चाहिए था लेकिन स्कूल प्रबंधन शिक्षकों को वेतन नहीं दे रहे है
वैश्विक महामारी कोरोनावायरस के कारण विगत 22 अप्रैल से पुन:लॉकडाउन है झारखंड के सभी कॉलेज स्कूलें बंद है निजी स्कूल बंद होने से  शिक्षक व शिक्षिकाएं की स्थिति काफी नाजुक और दयनीय स्थिति बना हुआ है तथा निजी विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षकेतर कर्मचारी बेरोज़गार हो गए हैं अाैर उनके परिवारों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गई है। लॉकडाउन के दौरान सरकार ने हर वर्ग का ध्यान रखा और कहीं ना कहीं मदद की है लेकिन सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा शायद राज्य में चल रहे हजारों निजी स्कूलों के शिक्षकों को सरकार ने बेरोजगार नहीं मानते हुए, अब तक कोई पहल नहीं हो पाई है और ना ही तो कोई किसी प्रकार की राहत पहुंचाने की घोषणा । जबकि शिक्षित बेरोजगार एवं विद्वान शिक्षकों को वर्तमान परिस्थिति में हमारे आजीविका चलाने के लिए निजी स्कूल की नौकरी के अलावा ना तो कोई विकल्प है और ना ही कोई स्रोत।
सरकार से तत्काल राहत देने की मांग है 2020 में लॉकडाउन लगने के बाद निजी शिक्षकों की कमर ढीली पड़ गई है तथा हालात काफी बद से बदतर हो गई है एवं 2021 में भी लॉकडाउन लगा दिया गया है और विद्यालयों का पठन-पाठन बंद हो जाने से आर्थिक स्थिति काफी कमजोर बनी हुई है तथा पिछले 1 वर्ष से तनख्वाह नही मिलने से किसी तरह अपने परिजनों के साथ नमक भात खा कर अपनी भूख मिटा कर गुजारा कर रहे है। जो कुछ बचा कर रखे थे वह भी अब खत्म हो चुका है संकट उत्पन्न हो गई है वर्तमान परिस्थिति में सरकार को इसे गहराई से मंथन करना चाहिए ताकि शिक्षित बेरोजगार निजी विद्यालयों के शिक्षक शिक्षिकाओं को भी वैश्विक महामारी में कुछ लाभ मिल सके क्योंकि राज्य की शिक्षा व्यवस्था के सुधार और विकास में कहीं न कहीं इनकी भी आम भूमिका है। वही निजी विद्यालयों का संचालक शिक्षकों की कड़ी मेहनत से चलती है हम निजी शिक्षक बहुत ही कम तनख्वाह में अपनी ओर से छात्रों की निर्बाध सेवा देने का कार्य करते आ रहे हैं। बच्चों के साथ साथ स्कूल को भी सींचने में कोई कोर कसर  नही छोड़ते है लेकिन जब आज हमें जरूरत
पड़ी है देखनेवाला कोई नही है।
सरकार से मांग करके हैं इस दयनीय परिस्थिति में सरकार विचार विमर्श करें तथा निजी स्कूलों के शिक्षकों को शत प्रतिशत अध्यापन देने पर विचार करें ।

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