हनुमान की जन्मस्थली के विकास के लिए लोगों के दिलों में उठने लगी है चिंगारी

राम मंदिर निर्माण से जगी गुमला के लोगों में आंजन धाम की विकास की आश
बसंत कुमार गुप्ता
गुमला : अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर हुए भूमि पूजन के बाद राम भक्त हनुमान की जन्मस्थली आंजन धाम के विकास की आश लोगों में जगने लगी है। राम मंदिर के लिए तो वर्षों से संघर्ष किया गया लेकिन अब एक चिंगारी हनुमान की जन्मस्थली के विकास को लेकर भी लोगों के दिलों में उठने लगी है। गुमला को धार्मिक व आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए हनुमान की जन्मस्थली का विकास जरूरी है।
आंजन धाम भारतीय संस्कृति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है। आंजन गांव माता अंजना की तपोभुमि रही है। आंजन गांव में 365 तालाबों, 360 शिवलिंग और 360 महुआ के पेड़ हुआ करते थे जो वर्तमान समय में विलुप्त हो गये हैं। इनकी पहचान कर इन एतेहासिक धरोहरों को संवारने व सजाने की जरूरत है। जिसमें माता अंजनी प्रतिदिन एक महुआ की पेड़ से दतवन कर, एक तालाब में स्नान करतीं और एक शिवलिंग में जल अर्पण करती थीं। आंजन धाम मंदिर में स्थापित माता अंजनी की गोद में बालक हनुमान की प्रतिमा पूरे विश्व की सबसे प्रसिद्ध व एकलौता प्रतिमा है। जो आज भी नीचे आंजन मंदिर में है।

माता अंजनी की गोद में विराजे बाल हनुमान के दर्शन को कई राज्यों से श्रद्धालुओं का आगमन होता है। इस गांव में आज भी सैकड़ों शिवलिंग जहां-तहां बिखरे पड़े हैं, जबकि कई भूमिगत हैं। इस क्षेत्र के विकास से जहां पूरे झारखंड में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं क्षेत्र के बेरोजगारों को कई तरह के रोजगार प्राप्त होंगे। लेकिन आज परिस्थिति यह है कि बाल हनुमान के दर्शन मार्ग पर है रोड़े ही रोड़े पड़े हुए हैं। जिला मुख्यालय से 17 किमी दूर स्थित आंजनधाम आज भी उपेक्षित है। आंजन से मंदिर तक पहुंच पथ की स्थिति जर्जर है। लंबे समय से हिंदु संगठन व स्थानीय लोग मंदिर के विकास की मांग करते रहे है लेकिन आज भी यह धाम पर्यटक स्थल के रुप में विकसित नहीं हो सका है। बारिश में मंदिर तक वाहन से पहुंचना कठिन हो जाता है। पथरीले रास्ते के कारण भक्तों को परेशानी है.