ईसीएल की लापरवाही से बुझा परियोजना अधिकारी के घर का चिराग

– राजमहल परियोजना द्वारा कोयला निकालने के लिए खोदे गए गड्ढे में डूबने से ईसीएल कर्मी के पुत्र की हुई मौत
शंकर सुमन/मो अकबर अली की रिपोर्ट
महागामा/ललमटिया : ईसीएल की राजमहल परियोजना, ललमटिया प्रबंधन की लापरवाही से परियोजना के एक अधिकारी के घर का चिराग होली के दिन बुझ गया। राजमहल खुली खान परियोजना द्वारा कोयला उत्खनन के क्रम में द्वारा खोदे गए गढ्ढे में डूबने से परियोजना के अधिकारी अमरिंदर राव के इकलौते 22 वर्षीय पुत्र सत्यजीत राव की सोमवार को मौत हो गई । गोताखोरों द्वारा करीब 9 घंटे की मशक्कत के बाद शव को गहरा गड्ढा नुमा तालाब से निकाला गया।
मृतक सत्यजीत राव इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक निजी कंपनी में कार्यरत था। होली की छुट्टी में अपने परिवार के पास आया था। सोमवार को होली के रंग में सराबोर होने के बाद अपने चार-पांच दोस्तों के साथ अपराह्न तीन से चार बजे के बीच ललमटिया थाना क्षेत्र स्थित छोटा सिमरा गांव के पास स्थित तालाब में नहाने गया था। ईसीएल द्वारा कोयला निकासी के उपरांत गड्ढा को नहीं भरे जाने के कारण यह तालाब बन गया था। इसकी गहराई 20 से 30 फीट तक थी। इस गहरे गड्ढे में उतर कर सत्यजीत ने जब डुबकी लगाई, वह डूब गया। रात 12 बजे के उसकी लाश ही निकाली जा सकी।
सत्यजीत राव के तालाब में डूबने की खबर इलाके में तेजी से फैल गई। घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। कुछ लोगों ने साहस का परिचय देते हुए तालाब में उतर कर सत्यजीत को खोजने की भी कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। परियोजना प्रबंधन एवं पुलिस द्वारा पड़ोसी राज्य बिहार के बांका जिला से गोताखोरों को मंगवाया गया। गोताखोरों ने काफी मशक्कत के बाद रात करीब 12:30 बजे शव को तालाब से बाहर निकाला।
घर वालों का रो रो कर बुरा हाल था। मृतक युवक मां-बाप का एकलौता पुत्र एवं दो बहनों का इकलौता दुलारा भाई था।
शव को तालाब से बाहर निकाले जाने के बाद ललमटिया थाना को सुपुर्द किया गया। पुलिस प्रशासन के द्वारा मंगलवार की सुबह पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, गोड्डा भेज दिया गया।

ईसीएल की लापरवाही पर गुस्सा उतार रहे थे ग्रामीण

इस घटना को लेकर ईसीएल की आवासीय कॉलोनी उर्जा नगर में जहां मातमी सन्नाटा पसरा रहा, वही अगल-बगल के गांव वासियों में ईसीएल की कार्यपद्धति को लेकर गहरा असंतोष दृष्टिगोचर हो रहा था। ग्रामीणों का कहना है कि यह ईसीएल की सरासर लापरवाही है। ईसीएल जब कोयला निकलने के लिए गढ्ढा खोद सकती, तो कोयला निकालने के बाद गड्ढे को भरने का काम क्यों नहीं करती? यदि खोदे हुई गड्ढे को भर दिया जाता, तो ऐसी घटना नहीं होती। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना क्षेत्र के गांव में इस तरह के गड्ढे गहरे आधा दर्जन से अधिक हैं, जो दुर्घटना को साक्षात आमंत्रित करते प्रतीत हो रहे हैं।

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