गुमला जिले में वनों की अवैध कटाई नहीं रुकी तो गुमला मरुस्थल में तब्दील होगा : राजेंद्र गुप्ता

गुमला : गुमला जिला के जाने-माने समाजसेवी पूर्व पार्षद राजेंद्र गुप्ता ने एक प्रेस बयान जारी कर कहां है कि गुमला जिला के रायडी प्रखंड और सिमडेगा के कुरडेग प्रखंड के सीमा में अवस्थित रमजा, कोबजा, कोंडरा, मोकरा, सुरसांग,बीरकेरा, आदि ग्रामीण क्षेत्र जंगलों से भरा पड़ा है अभी 1 वर्ष के अंदर बहुत सारे मोटे-मोटे साल, सखुआ, अन्य कीमती लकड़ियां वन विभाग की मिलीभगत से दर्जनों ट्रक अवैध लकड़ी बिहार के पटना नवादा सासाराम झारखंड के रांची धड़ल्ले से भेजा जा रहा है अभी 5 महीना पूर्व 10 चक्का ट्रक में 10 से 12 ट्रक अवैध लकड़ी भरा पकड़ा गया जो वन विभाग गुमला में पड़ा हुआ है इतना ही नहीं 10 दिन पूर्व छत्तीसगढ़ बॉर्डर में करीब 130 लकड़ी का बोटा पकड़ा गया वह भी लकड़ी वन विभाग गुमला में रखा हुआ है जिसकी कीमत 5: से 6 लाख रुपैया होगा जो 10 चक्का मैं करीब 7 ट्रकों मैं पकड़ा गया है जिसमें एक ट्रक में लगा लकड़ी का मूल्य 6 से ₹7 लाख रुपया है। इसी प्रकार इस जिले से कामडारा, सिसई बसिया पालकोट रायडी चैनपुर एवं डुमरी में धड़ल्ले से लकड़ी कटाई का अवैध कटाई कर बाहर भेजा जा रहा है इसको ना कोई देखने वाला है और ना ही पकड़ने वाला है ऐसा लगता है सरकार और प्रशासन दोनों सोए हुए हैं वन पदाधिकारी से इस विषय पर पूछने पर कहते हैं कि वन विभाग में वन कर्मी और अफसर स्टाफ की भारी कमी है इसलिए काफी दिक्कत हो रही है पदाधिकारी ने बताया कि गुमला जिले में 5 रेंज अफसर की जगह है जिसमें मात्र एक कार्यरत है उसी प्रकार अट्ठारह फॉरेस्टर की जगह है उसमें मात्र चार फॉरेस्टर से काम लिया जा रहा है ऊपर से हम लोगों को बराबर रांची गुमला में मीटिंग होते ही रहता है इसलिए हम लोगों को काफी परेशानी हो रही है। श्री राजेंद्र गुप्ता ने झारखंड सरकार और जिला प्रशासन से अपील किया है कि वन विभाग में कर्मचारियों की कमी और साथ ही साथ अवैध रूप से हो रही जंगल की कीमती लकड़ियों की तस्करी और वनों की उचित कटाई पर उचित करवाई करने की आवश्यकता है नहीं तो अगर इसी तरह से जिला से वनों की अंधाधुन कटाई की रफ्तार रही तो जिला रेगिस्तान किस श्रेणी में चला जाएगा और यहां का वातावरण बदल जाएगा जिससे यहां के रहने वाले वासियों को काफी परेशानी होगी।