हनवारा- नयानगर सड़क की मरम्मत के नाम पर हुई खानापूर्ति

– सड़क की गड्ढों में जगह जगह भरा है पानी
जावेद अख्तर की रिपोर्ट
हनवारा: हनवारा -, नयानगर मुख्य सड़क की मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई। कुछेक गड्ढों को भरने के बाद सड़क को यूं ही बेहाल छोड़ दिया गया। अभी भी सड़क पर गड्ढे की कमी नहीं है। मालूम हो कि हनवारा – नयानगर मुख्य सड़क का जायजा लेने लगभग एक सप्ताह पूर्व पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यपालक अभियंता मुन्ना लाल हनवारा पहुंचे थे। उन्होंने जर्जर सड़क का निरीक्षण भी किया था। निरीक्षण के बाद सड़क के बीचो-बीच बने बड़े-बड़े गड्ढे को देखे थे। इस दौरान कार्यपालक अभियंता ने अविलंब सड़क मरम्मत करने का निर्देश संबंधित ठेकेदार एसके टेकरीवाल को दिया था। साथ ही सड़क के किनारे बनाए गए नाले की साफ- सफाई कराने का भी निर्देश दिया था। उन्होंने दो से तीन दिनों के अंदर गड्ढे में मटेरियल डालकर मरम्मत करने का निर्देश दिया था।
सड़क के बीचो-बीच बना गड्ढा बरसात के दिनों में काफी खतरनाक हो गया था, जिसके कारण वाहनों का परिचालन बाधित हो जाता था।हनवारा हाट के निकट गड्ढे इतने बड़े हो गए थे कि हर दिन गाड़ी उसमें फंस जा रही थी जिसके कारण और गाड़ियों की लंबी कतारे लग जाती थी‌। इस कारण से आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता था। स्थानीय लोगों का कहना है कार्यपालक अभियंता का सारा निर्देश सड़क के ठेकेदारों के सामने फीके पड़ गए। ठेकेदार ने हनवारा- नयानगर मुख्य मार्ग की मरम्मत के नाम पर सिर्फ लीपापोती की। दिखावे के लिए कहीं-कहीं गड्ढा भरने की खानापूर्ति की गई ।अभी भी सड़क पर बने गड्ढे में राहगीर गिरकर घायल हो रहे हैं। ज्ञात हो कि ढाई वर्ष पूर्व एसके टेकरीवाल कंपनी के द्वारा 21 किलोमीटर पीडब्ल्यूडी सड़क का निर्माण कार्य कराया गया था।जिसकी गुणवत्ता अच्छी नहीं होने के कारण जहां-तहां सड़क के बीचो-बीच बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। गड्ढा होने का दूसरा कारण भारी भरकम गिट्टी, पत्थर लोड वाहनों का परिचालन भी एक कारण है। इस दौरान करीब डेढ़ किलोमीटर कार्य नयानगर से नरैनी, कोयला और परसा के बीच 500 मीटर आदि उक्त पथ को भी मरम्मत करने का निर्देश दिया गया था, ताकि छोटी वाहन का परिचालन हो सके।
कार्यपालक अभियंता ने कहा था कि 21 किलोमीटर सड़क में जहां भी गड्ढे हैं, उस गड्ढे की मरम्मत की जाए, ताकि वाहनों के परिचालन में कोई परेशानी नहीं हो। लोगों का कहना है कि विभाग के अधिकारियों द्वारा निर्देश दिए जाने के बाद भी संवेदक द्वारा लापरवाही बरती गई है।