क्या नीति आयोग का सुरक्षा चक्र टूट गया है?

जामताड़ा से राज किशोर सिंह की रिपोर्ट

जामताड़ा: कोविड-19 के तीसरे वेब आने की चर्चा है। जिससे बच्चें प्रभावित होंगे। इनको बचाने के नाम पर धनबाद, जामताड़ा, दुमका और पाकुर का दौरा नीति आयोग, भारत सरकार के सीएसओ एस्टेंडिग कमिटी सदस्य संजय कुमार मिश्रा ने किया। इसके लिए उपायुक्तों को संजय कुमार मिश्रा के तथाकथित प्रधान सचिव सुनील कुमार गुप्ता के हस्ताक्षर से ई मेल जारी हुआ। जिसका ज्ञापांक CSO/SD/COM/RNC/13 /2021 दिनांक 5 जून 2021 है। सुनील कुमार गुप्ता ने अपना मो. 8709788290 भी जारी किया है। मो रांची का है। ऐसे में माननीय सदस्य का ओएसडी रांची में क्या कर रहा है? आखिर सुनील कुमार गुप्ता है कौन? जिसके हस्ताक्षर से जारी पत्र पर सभी उपायुक्त रेस हो गये। क्या यह नीति आयोग का अधिकार है?
संजय कुमार मिश्रा के दौरे के लिए उपायुक्तों ने एडवाइजरी जारी किया। उन्हें सचिव रेंक का दर्जा दिया गया। जिले के सिविल सर्जन से ले कर आला पदाधिकारियों सभी आवश्यक काम छोड़कर संजय कुमार मिश्रा के बैठक में भाग लिया। संथाल के एक जिला में तो इन्हें उपायुक्त ने गार्ड ऑफ ऑनर तक दिलवा दिया। उनसे जागरूकता रथ भी रवाना करवाया गया।
अब इस पत्र को समझिए। जो सुनील कुमार गुप्ता के हस्ताक्षर से जारी हुआ।
पत्र के हेड पर सुनहरे चमकिले रंग से भारत का गौरव व मर्यादा अशोकस्तंभ छपा है। पत्र की बांयी ओर संजय कुमार मिश्रा सदस्य, सी एस ओ, एस्टेंडिग कमिटी नीति आयोग, भारत सरकार सह पूर्व सदस्य, झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग छपा है।
यहां पूर्व सदस्य झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की आवश्यकता नीति आयोग में क्या है? अब पत्र की दांयी तरफ देखिए। यहां आवासीय पता : सरस्वती नगर कमड़े, रातु रोड, रांची 835222 झारखंड
मो 94311 14532
ksanjaymishra@rediffmail.com है। यहां पर संजय कुमार मिश्रा का रांची कार्यालय , नीति आयोग का बेब और मेल एड्रेस नहीं है। अर्थात जिला प्रशासन को झांसे में रखने के लिए एक सफेद कागज पर संजय कुमार मिश्रा के दौरे की जानकारी दी गई। जिसके घनचक्कर में सभी उपायुक्त उलझ गए। संजय कुमार मिश्रा के दौरे से झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को कोई लेना देना नहीं है। झारखंड राज्य के आईसीपीएस निदेशक डीके सक्सेना अनभिज्ञ हैं। उन्होंने संजय कुमार मिश्रा से ही पूछने का मशविरा दिया है। वहीं इस दौरे के बाद जिला प्रशासन सवालों के कटघरे में है। ऐसा कर जिला प्रशासन राष्ट्र के भविष्य संवारने वाले नीति आयोग की महत्ता, मर्यादा, गोपनीयता, गंभीरता और सुरक्षा में सेंध लगाने में संजय कुमार मिश्रा का साथ दिया है।
जबकि किसी भी आयोग के माननीय सदस्य के दौरे की जानकारी जिला प्रशासन को भारत सरकार के संबंधित कार्यालय से राज्य सरकार को मिलता है। जिसे राज्य सरकार का संबंधित विभाग संबंधित जिले के लिए एडवाइजरी जारी करती है। ऐसे में चारों जिलों के उपायुक्त, जिन्होने संजय कुमार मिश्रा के दौरे का एडवाइजरी जारी कर अनुपालन करवाया। इस पर भारी खर्च के साथ कोरोना महामारी के वक्त सरकारी एजेंसियों के काम में दखलअंदाजी और भ्रम पैदा किया है। इन सभी अधिकारियों के कंधे पर जिला में संविधान संरक्षण का भार है। इनसे ही लगता है संविधान संरक्षण में कोताही हो गया।
इसका एक पहलु यह भी है कि स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह जारी है। ऐसे में तुफानी दौरा के लिए राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय से नो ऑब्जेक्शन लेना चाहिए या नहीं।
इससे लगता है कि चारों जिले के उपायुक्त किसी जबरदस्त दबाव में काम कर रहें हैं। जो किसी भी तरह से अच्छा नहीं है।
इसकी निष्पक्षता से जांच कर कार्रवाई होनी चाहिए।

इस पर यक्ष प्रश्न उठा है। जिसका उत्तर जिला प्रशासन, राज्य सरकार और केन्द्र सरकार को विश्वसनीय एजेंसी से जांचोपरांत देना राष्ट्रीय हित में होगा।

एनजीओ के सदस्य को गार्ड ऑफ ऑनर लेने का अधिकार शायद नहीं है ।उपायुक्त के बैठक में एनजीओ के सदस्य आ सकते हैं। एनजीओ के सदस्य की अध्यक्षा वाली बैठक में उपायुक्त की एजेंसियां पहली बार जामताड़ा में भाग लिया है। एनजीओ के सदस्यों पर खर्च की गई राशि वसूलनी चाहिए। उन पर नीति आयोग की हैसियत से पत्र जारी करने पर मामला दर्ज होना चाहिए। ताकि दूबारा दूस्साहस कोई नहीं करें।

जामताड़ा डीसी क्या कहते हैं

जब जामताड़ा डीसी फेज अक अहमद मुमताज़ से बात किया की विगत दिनों आपके यहाँ जो नीति आयोग का सदस्य बनकर जिला के पदाधिकारियों के साथ बैठक किया. क्या वो सही मायने में केंद्र सरकार नीति आयोग के सदस्य थे. या फिर अन्य तो उन्होंने हलांकि दबी जुवान से स्वीकार किया की नीति आयोग के पदाधिकारी इस तरह बैठक नहीं करते हैं. बाद में उन्होंने कहा की नीति आयोग का कई तरह का विंग होता है. उसमें कोई हो सकते हैं.