जान जोखिम में डाल जीवन जीने को मजबूर है अग्निशमनकर्मी

बोकारो से जय सिन्हा
बोकारो: अपनी जान हथेली पर रख आपदा के वक़्त लोगो की जान बचाने वाले झारखंड अग्निशमन विभाग के जवान आज खुद ख़ौफ़ज़दा है। बोकारो इकाई में तैनात ये जवान चौबीसों घण्टे ख़ौफ़ में जीने को मजबूर है। पूरी तरह से जर्जर हो चुके इस भवन में अग्निशमन विभाग के बोकारो इकाई का कार्यालय सह आवास संचालित है, लेकिन व्यवस्था और अवस्था ऐसी की यहाँ रहने वाले इन जवानों का ख़ौफ़ज़दा होना लाजमी है। भवन के हर तरफ सीलन ही सीलन छत की स्तिथि ऐसी जैसे पतझड़ का मौसम हो हर वक़्त छत से कभी प्लास्टर का झड़ना या पानी का टपकना आम बात है। आप इन तश्वीरो को देख खुद ही अंदाजा लगा सकते है कि यहाँ रहने वाले अग्निशमनकर्मियों को कैसे अज्ञात हादसे का डर सताता होगा। कहने को तो ये सरकारी कर्मी है लेकिन हालात बयां कर रही है विभाग की अनदेखी की बजह से इनकी क्या स्तिथि बन चुकी है।
जब हमने यहाँ रहनेवाले अग्निशमनकर्मियों से बात की तो उन्होंने अपने अंदर छाए ख़ौफ़ को हमसे साझा किया, वही बातों ही बातों में बरसात का ज़िक्र किया उनके चहरे पर बरसात के दिनों में होने वाला परेशानी की लकीरें उनके चेहरे पर साफ झलक गया।
बातौर अग्निशमन पदाधिकारी बोकारो इकाई में तैनात राजकिशोर सिंह बताते है कि सुविधा के नाम पर यहाँ कुछ भी नही है हर वक़्त ख़ौफ़ के साये में वक़्त गुजरता है। साथ ही उन्होंने कहा कि अपने स्तर से उन्होंने भरसक प्रयास किये लेकिन विभाग का अपेक्षित सहयोग उन्हें नही मिला।
इतने ख़ौफ़ज़दा होने के बाबजूद भी इन अग्निशमनकर्मियों का आपदा से लड़ने वाले इन लड़ाकों का जज़्बा कम नही हुआ है। वो इन सभी समस्याओं से जूझते हुए भी अपनी ड्यूटी को ततपर है।
बहरहाल मौजूदा सरकार का अपने ही कर्मियों के प्रति यह रवैया काफी चौकाने वाला है, इतने वर्षों में कोई भी सरकार इनकी सुध क्यो नही ले पायी। पूरा अग्निशमन महकमा कुम्भकर्णी नींद में सोया हुआ है शायद उन्हें किसी बड़े हादसे का इंतज़ार हो।

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