झारखंड राज्य उर्दू शिक्षक संघ का सुझाव, मातृभाषा में मिले शिक्षा

रांची : सचिव स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग झारखंड के आदेशानुसार अवर सचिव प्राथमिक शिक्षा द्वारा शिक्षकों की प्रोन्नति निलंबन एवं सेवा संपुष्टि के संदर्भ में विभागीय अधिकारियों एवं शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की गई. जिसमें झारखंड राज्य उर्दू शिक्षक संघ के महासचिव अमीन अहमद, वरीय उपाध्यक्ष नाजिम अशरफ के साथ मकसूद जफर हादी, शमसाद आलम शामिल हुए.
शिक्षकों की समस्याओं का निदान के संदर्भ में होने वाली बैठक में झारखंड राज्य उर्दू शिक्षक संघ की ओर से सलाह एवं सुझाव समर्पित किया गया. है.

लंबित प्रोन्नति के आलोक में कहा गया कि अवर सचिव, प्राथमिक शिक्षा, झारखंड द्वारा दिनांक 23/12/2020 को जारी पर अमल किया जाए. जिसका पत्रांक 8/वि 1-281/2007(खण्ड -1) 1530 है. पत्र में स्पष्ट है कि बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के द्वारा वर्ष 1994 में नियुक्त सामान्य शिक्षक एवं उर्दू शिक्षक की पारस्परिक वरीयता निर्धारित की जानी है. बिहार लोक सेवा आयोग, पटना की अनुशंसा के आलोक में वर्ष 1994 में नियुक्त सामान्य शिक्षक एवं उर्दू शिक्षक के जिला स्तरीय वरीयता सूची में शिक्षकों का मेधांक पृथक-पृथक है. बिहार लोक सेवा आयोग, पटना के द्वारा वर्ष 1994 में विज्ञापित रिक्ति के दस प्रतिशत पद पर उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति की गयी थी. फलतः सामान्य शिक्षकों एवं उर्दू शिक्षकों हेतु अलग-अलग वरीयता सूची संधारित किया जाना है. उक्त पत्र में कहा गया है कि प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक प्रोन्नति नियमावली, 1993 के प्रावधानों के अनुसार ग्रेड-III या अन्य उच्चतर ग्रेडों जिनमें पद की संख्या निर्धारित है एवं रोस्टर क्लीयरेंस की आवश्यकता है, उन पदों पर सामान्य श्रेणी में प्रोन्नति हेतु उपलब्ध पदों के 10 प्रतिशत पदों पर उर्दू शिक्षकों के लिए संधारित पृथक वरीयता सूची से प्रोन्नति दी जाय. यह प्रावधान मात्र वर्ष 1994 में नियुक्त शिक्षकों के लिए ही प्रभावी है.
उपरोक्त पत्र के आलोक में हमारी संघ का सुझाव है कि 1994 के पहले नियुक्त शिक्षकों को प्रोन्नति देने के पश्चात जितने पद रिक्त रह जाते हैं, उसका 10% पद उर्दू शिक्षकों के लिए आरक्षित करते हुए प्रोन्नति दी जाए तथा इसे प्रोन्नति नियमावली में शामिल करने की मांग रखी गई.
प्रोन्नति के पश्चात पदस्थापन के समय इस बात का ख्याल रखा जाए कि उर्दू विद्यालयों में उर्दू भाषा में नियुक्त एवं उर्दू भाषा के जानकार शिक्षक-शिक्षिकाओं को ही पदस्थापित किया जाए .जिससे उर्दू भाषी विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा मिल सके. प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक प्रोन्नति नियमावली, 1993 के आलोक में पूरे राज्य के सभी जिलो में एक समान रूप से शिक्षकों को प्रोन्नति दी जाय. प्रोन्नति में भिन्नता होने के कारण अलग-अलग जिलों में शिक्षकों की वरीयता भिन्न-भिन्न है. इसमें एकरुपता लाना आवश्यक है.
शिक्षकों के प्रोन्नति में एकरुपता लाने के लिए प्रोन्नति का प्रावधान जिला स्तर के बजाए राज्य स्तर पर करने को कहा गया. भुतलाक्षी प्रभाव से सभी ग्रेड की प्रोन्नति देने को कहा गया.

सेवा संपुष्टि0के संदर्भ में कहा गया कि पुरे राज्य में तिथी निर्धारित कर सभी जिलों में एक साथ सेवा संपुष्टि की जाए.कदाचार मुक्त सेवा संपुष्टि के लिए जिलावार एवं प्रखंडवार कैंप का आयोजन हो. योगदान के प्रथम 3 वित्तीय वर्ष को ही सेवा संपुष्टि का आधार बनाया जाए.
निलंबन पर कहा गया कि निलंबन की अवधि 6 माह पूरा कर चुके शिक्षक-शिक्षिकाओं का निलंबन सामूहिक रुप से वापिस लेने का आदेश जारी किया जाए. नियमानुसार यदि 6 महीने के बाद भी निलंबन जारी रहता है तो देय राशि में बढ़ोतरी की जाय. समस्याओं का निदान निकाला जायेगा.