टाटा प्रबंधन के खिलाफ झामुमो ने किया हुड़का जाम

बोकारो साइडिंग में विधायक सुखराम और विधायक निरल पूर्ति के नेतृत्व में हुड़का जाम

बरायबुरु हाथी चौक में विधायक दीपक बिरुवा ने संभाला मोर्चा
रामगोपाल जेना
चाईबासा: टाटा प्रबंधन द्वारा झारखंड विरोधी कार्यों एवं टाटा कमिंस और टाटा मोटर्स का मुख्यालय पुणे ( महाराष्ट्र ) स्थानांतरण करने का प्रयास के खिलाफ बुधवार को कोल्हान प्रमंडल स्थित टाटा समूह के सभी इकाइयों में झामुमो ने हुड़का जाम किया।

बोकारो साइडिंग में झामुमो जिलाध्यक्ष सह विधायक सुखराम उरांव, विधायक निरल पूर्ति, सोना देवगम आदि के नेतृत्व में हुड़का जाम किया गया।
जबकि बरायबुरु हाथी चौक में विधायक दीपक बिरुवा के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ता पारंपरिक हथियार तीर कमान के साथ प्रर्दशन में शामिल हुए। प्रदर्शन को झामुमो केंद्रीय सदस्य सुभाष बनर्जी, महिला मोर्चा अध्यक्ष मोनिका बोयपाई, रिमू बहादुर, दुर्गा चरण देवगम, अशोक दास, बामिया मांझी, बामिया पूर्ति, पार्वती किड़ो, झामुमो सदर प्रखंड अध्यक्ष सतीश सुंडी, चाईबासा नगर अध्यक्ष राहुल तिवारी, शमशाद आलम, अजय टोपनो, रंजीत यादव, गोवर्धन चौरसिया, प्रेमनाथ गुप्ता आदि ने संबोधित किया।

मुख्य मांगें :- टाटा कमिंस/टाटा मोटर्स का मुख्यालय महाराष्ट्र शिफ्ट करने का फैसला वापस लो । झारखंड सरकार के निर्णयानुसार टाटा समूह के सभी इकाइयों में 75% स्थानीय लोगों को लेना सुनिश्चित करो ।
ट्रेंड अप्रेंटिस में, प्रभावित, विस्थापित, आदिवासी एवं मूलवासी झारखंडियों को शत प्रतिशत बहाल करो ।
टाटा समूह के खदानों एवं कल-कारखानों से प्रभावित एवं विस्थापित परिवारों को अविलंब सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक पुनर्वास दो ।
सीएसआर के तहत किए जा रहे कार्यों एवं खर्च का ब्यौरा सार्वजनिक करो ।
टाटा कमिंस/टाटा मोटर्स – आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र से शत प्रतिशत कल पुर्जों तथा इलेक्ट्रिकल उत्पाद की आपूर्ति सुनिश्चित करो ।
7. सीएनटी एक्ट का उल्लंघन बंद करो ।

विधायक दीपक बिरुवा ने कहा- कंपनी अपना फैसला बदले, नहीं तो होगा उग्र आंदोलन

सीएसआर कार्यों की जांच होगी तो खुलेगी कंपनी की सारी पोल

झामुमो केंद्रीय महासचिव विधायक दीपक बिरुवा ने कहा यह एक सांकेतिक प्रदर्शन है, इसके बाद भी टाटा प्रबंधन अपना निर्णय नहीं बदलेगा तो उग्र आंदोलन होगा। विधायक दीपक बिरुवा ने कहा कि टाटा प्रबंधन द्वारा सीएसआर के तहत क्या काम किया गया है। एक दशक का अंकेक्षण किया जाएगा तो सारा पोल खुल जाएगा। आज टाटा कंपनी दुनिया में अपना ब्रांड बना चुकी है, तो सिर्फ़ यहां के लोगों की बदौलत। जिन्होंने
शुरुआती दौर में कंपनी को खून पसीना मेहनत कर सींचकर कंपनी को एक ओहदे पर पहुंचाया। अब यही कंपनी लोगों को उजाड़ने में तुली है।