कल के सूर्य ग्रहण पर अद्भुत संयोग: पंडित नितेश

-दिन में ही होगा रात का एहसास
गोड्डा से अभय पलिवार की रिपोर्ट
गोड्डा: 25 साल बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण पर अद्भूत संयोग दृष्टिगोचर होगा ‌। दिन में ही रात जैसा होगा अहसास होगा। पंडित नितेश मिश्र के अनुसार, राशि के हिसाब से सूर्य ग्रहण का असर पड़ेगा। एक साथ दो खगोलीय घटनाएं हो रही हैं। 21 जून वर्ष का सबसे बड़ा दिन है। रविवार का दिन भी है और इसी बड़े दिन पर सूर्य ग्रहण भी लग रहा है।
पंडित मिश्रा ने बताया कि 21 जून को साल का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह न तो आंशिक और न ही पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। चंद्रमा की छाया सूर्य का लगभग 98.8 फीसदी ही भाग ढकेगा। इसके कारण आसमान में सूर्य एक आग की अंगूठी की तरह दिखेगा। इससे पहले 24 अक्टूबर 1995 में ऐसा ग्रहण लगा था। लगभग 25 वर्षों बाद ऐसा ग्रहण लगने जा रहा है।
नितेश मिश्रा ने बताया कि ग्रहण की शुरुआत तो 9 बजकर 16 मिनट से हो जाएगी, लेकिन भारत में इसका आरंभ सुबह 9 बजकर 56 मिनट पर होगा और यह सबसे पहले गुजरात के द्वारका शहर में दिखेगा। यहां ग्रहण का मध्य दिन में 11:30 पर होगा जबकि ग्रहण का मोक्ष 1:20 पर होगा। जबकि 2:28 पर पूरे देश में ग्रहण समाप्त हो चुका होगा। इस सूर्य ग्रहण का आरंभ और समापन का समय भारत में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग रहेगा।
पंडित मिश्रा के अनुसार एक साथ दो खगोलीय घटनाएं हो रही हैं। 21 जून वर्ष का सबसे बड़ा दिन है। रविवार का दिन भी है और इसी बड़े दिन पर सूर्य ग्रहण भी लग रहा है। रविवार सूर्य देवता की उपासना के दिन के तौर पर जाना जाता है। एक अनुमान के अनुसार दिन में ही अंधेरा होने का अहसास होगा।

एक साथ दो खगोलीय घटनाएं

सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसमें चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी एक सीध में आने से यह घटना घटित होती है। लेकिन ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है। 21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण दूसरा ग्रहण होगा, इसके पहले इसी महीने की पांच जून को भी चंद्र ग्रहण लगा था। 21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण गोड्डा जिला में सुबह 10 बजकर 42 मिनट से आरंभ हो जाएगा। दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर मध्य में सूर्य ग्रहण का प्रभाव चरम पर होगा। गोड्डा में सुबह 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 2 बजकर 14 मिनट तक इसका असर रहेगा।

सूर्य ग्रहण को कंकण सूर्य ग्रहण कहा जाएगा

नितेश मिश्रा ने बताया कि 21 जून को होने वाला सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य एक चमकते हुए कंगन की भांति दिखाई देगा। इसलिए इस सूर्य ग्रहण को कंकण सूर्य ग्रहण कहा जाएगा। ग्रहण के दौरान जब पृथ्वी और सूर्य के बीच चंद्रमा आ जाएगा, तब चंद्रमा सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाएगी। ऐसे में सूर्य सोने की अंगूठी की तरह दिखाई देगा। यह ग्रहण वलयाकार होगा जिमसें चांद सूरज को पूरी तरह से ढक नहीं पाएगा। अगर चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक लेता तो यह पूर्ण सूर्य ग्रहण कहलाता। इस वलयाकार सूर्य ग्रहण में चंद्रमा 30 सेकंड के लिए ही सूर्य को ढक पाएगा। सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त एहतियात बरतनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को घर में रहने और संतान गोपाल मंत्र का जाप करने को कहा जाता है। ग्रहण के समय बालक, बुजुर्ग और मरीजों को छोड़कर दूसरे लोगों को भोजन का त्याग करना चाहिए।

शुरू हो चुका है सूतक काल

नितेश मिश्रा ने बताया कि सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक प्रभावी हो जाता है। ऐसे में 21 जून से पहले 20 जून की रात के 10 बजकर 42 मिनट से सूतक शुरू हो गया है और ग्रहण की सामाप्ति पर खत्म होगा। सूर्य ग्रहण में सूतक ग्रहण के स्पर्श होने से ठीक 12 घंटे पहले प्रारंभ हो चुका है। ऐसे में देश में ग्रहण का स्पर्श का समय !अलग-अलग होने से सूतक का समय भी अलग-अलग होगा। सूतक काल में मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।