कमलदेव गिरी ने चक्रधरपूर पुलिस प्रशाशन पर सवाल खड़ा किया ,कहा – हाई कोर्ट व मानवाधिकार जाऊंगा

रामगोपाल जेना
चक्रधरपुर:गुरुवार की शाम शहर के शैण्डिक धर्मशाला में गिरीराज सेना प्रमुख कमलदेव गिरि ने प्रेस कांफ्रेंस में चक्रधरपुर पुलिस प्रसाशन पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन उन्हें और उनके परिवार को लगातार प्रताड़न कर रहा है। उन्हें ठुझे मुकदमों में फंसाएं जा रहे है। उनका गुनाह इतना है कि वह नगर परिषद का चुनाव लड़ने को लेकर जनता के बीच रह कर तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य करना और चुनाव लड़ना गुनाह है तो वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनके विरोधियों के ईशारे पर प्रशासन उनके ऊपर झूठे केस मुकदमा दर्ज कर उनको चुनाव लड़ने से रोकने का षड्यंत्र रच रहे हैं। उन्हें मानसिक, आर्थिक और शारीरिक रुप से प्रताड़ित किया जा रहा है। वे अब प्रशासनिक प्रताड़ना से इतने परेशान हो चुके हैं कि उन्होंने काफी सोच विचार के बाद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया है और यह फैसला एक मजबूर भाई और अभागा बेटा ले रहा है। श्री गिरी अब अपने परिवार की चिंता से परेशान हैं। वह इतना भावुक हुए की वे फूट-फूट कर रोने लगे। कमलदेव गिरी ने बताया कि उनके घर में परिवार के चार सदस्य गंभीर रोग से पीड़ित हैं। एक बहन की शादी अगले माह होने वाली है। घर में कई तरह की परेशानी है, उसमें प्रशासन द्वारा लगातार प्रताड़ित किये जाने व झूठे मुकदमें में उन्हें बार-बार फंसाए जाने से उनका घर सदमें में है। उन्होंने बताया कि गिरिराज सेना के द्वारा महिलाओं को रोजगार देने से लेकर कमजोर लोगों के उत्थान का सामाजिक कार्य किया जाता है। संगठन का मूल मंत्र निस्वार्थ भाव से जनता की सेवा और और सहायता करना है। इस उद्देश्य के साथ गिरिराज सेना काम कर रही थी।लेकिन जैसे ही नगर परिषद् चुनाव सामने आने लगा है। उनके ऊपर एक के बाद एक झूठे केस लगने शुरु हो गए और यह सब उनके प्रतिद्वंद्वियों के इशारे पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि वे जब जेल से छूटकर वापस आ रहे थे, तो कुछ लोगों ने उनका पवन चौक में स्वागत किया, पटाखे भी फोड़े। उन्होंने किसी को भी भीड़ जुटाने, उनका स्वागत करने व पटाखा फोड़ने को नहीं कहा था। जिस चौक में भीड़ जुटी थी उस पवन चौक में पुलिस प्रशासन के लोग हमेशा तैनात रहते हैं। अगर कोविड नियमों का उलंघन कर भीड़ जुट रही थी तो पुलिस को भीड़ जुटने से पहले भीड़ को हटा देना चाहिए था। लेकिन पुलिस प्रशासन ने ऐसा ना कर भीड़ को जुटने दिया और फिर मेरे ऊपर मुकदमा दर्ज किया। अगले सुबह कई गाड़ियों में भरकर थाना प्रभारी पुलिसकर्मियों के साथ मेरे घर आये और मेरी बूढ़ी मां और बहन के साथ बदतमीजी की गयी। मेरी मां को पुलिस ने धक्का मारा। ये सब एक बेटा बर्दाश्त नहीं कर सकता। मेरे साथ जो कुछ हो रहा है। इसका जवाब जनता देगी। जनता जानती है कि मेरे साथ क्या हो रहा है। मैं इतना प्रताड़ित हो चूका हूं कि मैं अब चुनाव लड़ने का अपना फैसला वापस ले रहा हूं।