केंद्र सरकार की नियत काला, इसीलिए बनाया काला कृषि कानून: हरिमोहन मिश्रा

– कहा, आंदोलनकारी किसानों के साथ कांग्रेस का हाथ

अभय पलिवार की रिपोर्ट
गोड्डा: अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सदस्य हरि मोहन मिश्रा ने कहा है कि केंद्र सरकार की नियत काला है, दिल काला एवं जुबान काला है, इसीलिए किसानों के लिए काला कृषि कानून बनाया गया है। काले कृषि कानून के खिलाफ आंदोलनरत किसानों के साथ कांग्रेस का हाथ है। कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान 75 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार हठधर्मिता पर कायम है। लेकिन किसान सरकार को झुका कर रहेंगे। किसानों के समर्थन में कांग्रेस द्वारा झारखंड में भी चरणबद्ध आंदोलन किया जा रहा है।
जिला कांग्रेस कार्यालय में मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री मिश्रा ने कहा कि 75 दिनों से किसान शांतिपूर्ण एवं गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा किसानों के ऊपर उपद्रव किया जा रहा है। किसानों पर झूठा मुकदमा दायर किया जा रहा है। किसानों के बीच केंद्र सरकार का चेहरा बेनकाब हो रहा है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सह झारखंड के वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव के निर्देश पर कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में हरि मोहन मिश्रा ने कहा कि इस काले कानून के विरुद्ध देश भर के किसान डटे हुए हैं। 175 किसानों ने इस आंदोलन में अपनी शहादत दी है। किसान पिछले 75 दिनों से तीनों कृषि कानूनों के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन केंद्र सरकार किसानों के आंदोलन का दमन करने पर लगी हुई है। जबकि दिल्ली की सीमाओं पर लाखों किसान शांतिपूर्ण ढंग से और गांधीवादी तरीके से काले कानून के विरोध में धरने पर बैठे हैं।
श्री मिश्रा ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री अपने वक्तव्य में भी संसद को गुमराह करने और देश को भटकाने की नई कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के द्वारा संवेदनहीनता दिखाते हुए आंदोलनकारियों का उपहास उड़ाया जा रहा है। सरकार की ओर से किसान संगठनों के साथ 11 दौर की बैठकें हो चुकी है। किसानों ने कानूनों की जिन खामियों का ब्यौरा दिया, उसमें 18 संशोधन करने की बात स्वीकार की गई। ऐसे में कृषि मंत्री का संसद में दिया गया वक्तव्य आपत्तिजनक और तथ्यों से परे है।
उन्होंने बताया कि पहला कृषि कानून हिंदुस्तान के मंडी सिस्टम को खत्म कर देगा‌। नष्ट कर देगा। दूसरा कानून जिससे हिंदुस्तान के सबसे बड़े बिजनेसमैन जितना भी अनाज स्टोर करना चाहते हैं, कर सकते हैं। तीसरा कानून जो सबसे अजीब है कि किसान अपनी कठिनाई को कोर्ट नहीं ले जा सकता है। इन तीनों कानूनों के विरोध में किसान दिल्ली के बाहर खड़े हैं और सरकार इनसे बात करने के बजाय इन्हें धमका रही है और इन पर बल प्रयोग कर रही है ।साथ ही इन किसानों को बदनाम करने की सरकार की साजिश भी सामने दिख रही है। श्री मिश्रा ने कहा कि बहुमत के घमंड में पूजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने की कोशिश केंद्र सरकार कर रही है। कांग्रेस पार्टी किसान आंदोलन का पूर्ण समर्थन करती है और सरकार से अनुरोध करती है कि अहंकार त्याग कर किसान की जायज मांग को मानते हुए तीनों कानूनों निरस्त करने की घोषणा करे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश यादव, उपाध्यक्ष ज्योतिंद्र झा, अमरेंद्र अमर, धनंजय यादव, विनय पंडित, राकेश रोशन, कांग्रेस के पर्यवेक्षक अशोक सिंह, अवधेश कुमार प्रजापति भी मौजूद थे।