कृषि को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न

खूंटी: प्राकृतिक, पुनर्जीवित एवम परंपरागत कृषि को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय तीन दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न हुआ। समापन के अवसर पर राज्य के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख पहुंचे और किसानों के अनुभव सुने। किसानों ने बताया कि तीन दिवसीय कार्यक्रम में जैविक, प्राकृतिक ऑर्गेनिक खेती की विस्तृत जानकारियां मिलीं। साथ ही कीटनाशक के प्रयोग के लिए जीवामृत, जीवांश और विभिन्न तरह के प्राकृतिक कीटनाशक बनाने की विधि सिखाई गयी। आने वाले समय में जैविक ऑर्गेनिक खेती के आधार राज्य के विभिन्न जिलों के किसान प्रगति के पथ पर अग्रसर होंगे।
किसानों के कार्यशाला के समापन सत्र में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि 34-40 लाख किसानों में से 24-लाख किसानों को प्रथम चरण में बिरसा किसान का दर्जा देंगे। चैम्बर ऑफ फार्मर्स का गठन करेंगे। कृषि नीति, कृषि निर्यात नीति और सब्जियों का न्यूनतम सार्थन मूल्य तय कर किसानों को बेहतर आय प्राप्ति के लक्ष्य तक पहुंचाएंगे। किसान यदि साथ देंगे तो इस राज्य को बेहतर कृषि उत्पादन के राज्य की श्रेणी में लाकर खड़ा करेंगे। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अगुवाई में किसानों से एक रुपया लेकर 50 हजार तक की कृषि ऋण माफ करने का काम किया है इससे कई किसानों की आर्थिक समस्याएं सुलझी हैं। अब आगे लगतार किसानों की बेहतरी के लिए कार्य करेंगे। झारखण्ड के किसानों को बिरसा किसान की श्रेणी में लाने का कार्य चलता रहेगा।
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक समेत अन्य समाजसेवियों ने भी संपोषित कृषि, प्राकृतिक और जैविक कृषि पद्धति को मानव स्वास्थ्य के लिए बेहतर बताया। साथ ही किसानों द्वारा बनाये जा रहे जीवामृत, शिवांश और अन्य प्राकृतिक खाद से किया जाने वाला फसल अन्य रासायनिक खाद संपोषित कृषि की तुलना में ज्यादा हेल्दी होता है। एक रिसर्च के मुताबिक प्राकृतिक अमृत खेती में साग सब्जियों में विटामिन मिनरल मौजूद रहते हैं।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण में किसानों ने अपनी जैविक प्राकृतिक खेती और प्राकृतिक खाद बनाने की विधि को अन्य किसानों से साझा किया। विभिन्न जिलों से आये किसानों ने प्राकृतिक रूप से तैयार अमृत खाद और संपोषित कृषि की के फायदे गिनाए और अन्य किसानों को भी संपोषित कृषि के तरीके से खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने बताया कि सरकार सखी मंडलों के माध्यम से दीदी बाड़ी योजना और अन्य कृषि बागवानी तथा मनरेगा से जुड़े कृषि कार्यों को बढ़ावा देकर संपोषित कृषि की दिशा में बेहतर कार्य किये जा सकते हैं।
झारखण्ड के विभिन्न जिलों से तीन दिवसीय कार्यशाला में संथालनपरगना, खूंटी, पालकोट, रामगढ़ गोला, पलामू, दुमका, पटमदा, गुमला, नारायणपुर, जामताड़ा और गिरिडीह के महिला और युवा किसान शामिल थे। साथ ही स्वामी विवेकानंद यूनिवर्सिटी के डॉ. सुदर्शन विश्वास, रामकृष्ण मिशन के डॉ विशाल धोटे, माधव, नित्यानंद दहल, बिंजु अब्राहम, लुरुसिंह सुतार, प्रेमशंकर, विवेक समेत कई संस्थाओं के प्रतिनिधि और सीएसओ उपस्थित थे। कार्यक्रम में अतिथियों को मोमेंटम देकर सम्मानित किया गया।