त्रिपुरा मे बीजेपी द्वारा वामदलों और मीडिया पर किए गए हमलों के खिलाफ वामदलों ने निकाला विरोध मार्च 

रांची: त्रिपुरा में भाजपा के गुंडों द्वारा मुख्य विपक्षी दल और मीडियाकर्मियों पर हिंसक हमलों के खिलाफ आज वामदलों ने पुरे राज्य में विरोध मार्च निकाल कर त्रिपुरा सरकार का पूतला दहन किया.
राजधानी रांची मे वामदलों के कार्यकर्ताओं ने अल्बर्ट एक्का चौक पर एकत्रित होकर भाजपा और त्रिपुरा सरकार के खिलाफ नारे लगाए और त्रिपुरा सरकार का पूतला दहन किया.
इस अवसर पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वामदलों के नेताओं ने कहा कि त्रिपुरा में भाजपा के कुशासन के खिलाफ लड़ने वाले ट्रेड यूनियनों और अन्य जन संगठनों को भी उनके कार्यालयों में तोड़फोड़, दस्तावेजों, वाहनों और अन्य संपत्तियों को आग लगाने सहित खुले हमलों का निशाना बनाया गया है और पुलिस प्रशासन केवल मूक दर्शक बना रहा है।

सीपीआई (एम) के राज्य मुख्यालय और अगरतला में सीटू सहित पूरे राज्य के लगभग सभी जिलों में सीपीआई (एम), सीपीआई, भाकपा (माले) और अन्य जन संगठनों के कार्यालयों पर भाजपा के गुंडों के नेतृत्व में भीड़ ने हमला किया। लोगों के महान और सबसे सम्मानित नेता, कॉमरेड दशरथ देव की प्रतिमा को तोड़ा गया और क्षतिग्रस्त किया गया; दस्तावेजों, फर्नीचर, वाहनों को दिन के उजाले में जला दिया गया, जो जाहिर तौर पर राज्य प्रशासन की मिलीभगत और समर्थन के साथ भाजपा के गुंडों द्वारा एक पूर्व नियोजित अभियान था। इस हमले मे सैकड़ों कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हुए है। यहां तक कि मीडिया को भी नहीं बख्शा गया। वाम दलों और जन संगठनों की पत्रिकाओं/मुखपत्रों के अलावा, कार्यालय और पत्रकार और सामान्य मीडिया के कार्यकर्ता, राज्य सरकार की कुछ कार्रवाइयों के खिलाफ आलोचनात्मक राय व्यक्त करने वाले सभी को इन शारीरिक हमलों में निशना बनाया गया।

भाजपा के गुंडों और बदमाशों द्वारा किया गया यह सुनियोजित हमला और कुछ नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के विनाशकारी शासन के खिलाफ जनता में बढ़ते असंतोष और अशांति के प्रति अति दक्षिणपंथी सत्तारूढ़ गुट की हताश प्रतिक्रिया है, जिसने मेहनतकश जनता के लगभग सभी तबकों की मुश्किलों को बढ़ाया है। लोग अपनी आजीविका खो रहे हैं, उन सभी कल्याणकारी उपायों से वंचित हैं जो उन्होंने पिछले वाम मोर्चा शासन के दौरान प्राप्त किए थे; इसके अलावा लोगों के असहमति व्यक्त करने और जायज मांगों को आवाज देने के सभी लोकतांत्रिक अधिकारों का फासीवादी तरीके से दमन किया जा रहा है। जनता के बीच यह अशांति पूरे राज्य में अधिक से अधिक लोगों, जो सभी हमलों का सामना कर रहे हैं, को शामिल करते हुए विरोध और आंदोलन के बढ़ते कार्यक्रमों के माध्यम से साफ दिखाई पड़ती है। राज्य की भाजपा सरकार की यह सोच पूरी तरह से गलत है कि वह विपक्ष की संस्थाओं और संगठनों पर इस तरह के फासीवादी हमलों के माध्यम से पूरे विपक्ष को कुचलकर और इन पैंतरों से अपने कुशासन के खिलाफ संघर्षों को दबा सकती है. भाजपा के इन हमलों से लाल झंडा लोकतांत्रिक तरीके से निपटेगा.
आज के विरोध कार्यक्रम मे सीपीआई (एम) के प्रकाश विप्लव, सुखनाथ लोहरा, सुरजीत सिन्हा, प्रफुल्ल लिंडा, भाकपा (माले) के शुभेंदु सेन, भुवनेश्वर केवट, भाकपा के अजय सिंह, मासस के सुशांत मुखर्जी के अलावा समीर दास, मोहन दत्ता, सोहेल अंसारी, नौरीन अख्तर, बीणा लिंडा सहित दर्जनों कार्यकताओं ने हिस्सा लिया.