मां सरस्वती की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में जुटे मूर्तिकार, कोरोना को लेकर जारी गाइडलाइन में तैयार में लगे हैं युवा

कन्हाचट्टी(चतरा) नीरज कुमार सिंह। विद्या की देवी माता सरस्वती की पूजा में अब महज एक दिन शेष रह गए हैं, ऐसे में विभिन्न स्तरों पर पूजा की तैयारी भी जोर शोर से चल रही है। वहीं प्रतिमा निर्माण करने वाले कलाकारों ने प्रतिमाओं पर रंगों का ब्रश चलाना तेज कर दिया है। हालांकि इस वार कोरोना को लेकर जारी गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए जिला मुख्यालय के अलावे प्रतापपुर, कुंदा, पत्थलगडा, गिद्धौर, इटखोरी, मयूरहंड, सिमरिया व कन्हाचट्टी आदि प्रखंडों में पूजा की तैयारी हो रही है। वहीं छात्र-छात्राएं सार्वजनिक स्तर पर प्रशासनिक मनाही को देखते हुए निजी स्तर मां सरस्वती की आराधना को लेकर तैयारी में जुटे हैं। मौसम के अनुकूल रहने के कारण कुम्हारों की मुर्तिया भी समय से तैयार हो चुकी है। लिहाजा मुर्तियों पर रंग-रोगन करना आसान दिख रहा है। दुसरी ओर महंगाई की मार झेल रहे मूर्ति निर्माण में लगे कलाकारों ने बताया कि पिछले साल 400 रुपये ट्रेलर मिलने वाली मिट्टी इस वार 800 रुपये ट्रेलर हो गई। सुतरी 115 की जगह 150 रुपये किलोग्राम, पुआल 50 रुपये बोझा मिला है। इसके अलावे काटी 90 रुपये व बांस 150 रुपये खरीद कर व्यवसाय कर रहा हूं। इसके अलावा पेंट की कीमतों में उछाल चमक को फीका कर दिया है। इतना ही नही पहले कुम्हारोट मिट्टी व बाद में बालू मिट्टी से मूर्ति बनाया जाता था, लेकिन अब महंगाई के कारण चिकनी मिट्टी से ही काम चलाना पड़ता है। कारीगरों के चेहरे पर बेबसी की झलक, कोई पुश्तैनी धंधे को बचाने में लगा है, तो कोई आत्म संतुष्टि के लिए अपनी कला का जौहर दिखा रहा है। इनके हाथों से मिट्टी को मूर्ति का नायाब रूप देख भले ही हर कोई तारीफ करने पर विवश है। मगर मूर्तियों में जान डालने वाले इन हुनरमंदों के कड़ी मेहनत के बावजूद इन्हें मनमाफिक रकम मिलने की गुंजाइश नहीं दिख रही है।