पलामू की आवाज बने मंत्री मिथिलेश, किया मगही व भोजपुरी को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने की मांग

गढ़वा से नित्यानंद दुबे की रिपोर्ट

गढ़वा : गढ़वा विधायक झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर पलामू प्रमंडल की आवाज बन रहे हैं। मंत्री श्री ठाकुर ने पलामू प्रमंडल सहित चतरा, हजारीबाग, धनबाद व कोडरमा के छात्रों की हित का ख्याल रखते हुए
मगही एवं भोजपुरी भाषा को क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में शामिल करने की मुख्यमंत्री से मांग किया है। ताकि पलामू प्रमंडल के गढ़वा पलामू लातेहार सहित उक्त सभी जिलों के अभ्यर्थियों को झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में समान अवसर मिल सके। इस संबंध में मंत्री श्री ठाकुर ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर मिलकर वार्तालाप कर मांग पत्र सौंपा है।
इस संबंध में मंत्री श्री ठाकुर ने मुख्यमंत्री को अवगत कराते हुए बताया कि झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं के लिए कुल 12 क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं को चिन्हित कर स्वीकृति दी गई है। चिन्हित 12 भाषाओ में पलामू प्रमंडल के तीनों जिला तथा चतरा जिला में प्रमुखता से उपयोग की जाने वाली क्षेत्रीय भाषा मगही एवं भोजपुरी शामिल नहीं है । इससे इन जिलों के अभ्यर्थियों को चयन में समान अवसर प्राप्त नहीं हो सकेगा। इन्हें भी समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में भोजपुरी तथा मगही को शामिल करना आवश्यक होगा। मंत्री श्री ठाकुर ने अवगत कराते हुए बताया कि झारखंड से मैट्रिक एवं इंटर पास छात्र ही झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा में शामिल हो सकते हैं । ऐसी स्थिति में बिहार और उत्तर प्रदेश के अभ्यार्थियों के शामिल होने की संभावना नहीं बनती है। जबकि क्षेत्रीय भाषाओं की सूची बंगला और उड़िया को रखा गया है। परंतु प्रावधान के अनुसार बंगाल और उड़िसा के अभ्यर्थी इन परीक्षाओं में भाग लेने के योग्य नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि हजारीबाग, बोकारो, धनबाद तथा कोडरमा जिलों में भी भोजपुरी तथा मगही भाषा प्रमुखता से प्रचलन में है। मंत्री श्री ठाकुर ने मुख्यमंत्री से इन दोनों भाषा को भी क्षेत्रीय भाषाओं की स्वीकृत सूची में शामिल करने का आदेश निर्गत करने का आग्रह किया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री ने सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया है।