मुआवजा की मांग को लेकर भूख हड़ताल

गोड्डा से अभय पलिवार की रिपोर्ट
गोड्डा : पिछले दिनों बेमौसम आंधी, तूफान, बरसात एवं ओलावृष्टि के कारण सदर  प्रखंड क्षेत्र के नुनबट्टा पंचायत के हडगा टोला निवासी चुन्नी साह घर गिर जाने के कारण बेघरवार हो गया है। फसल भी क्षतिग्रस्त हुई है। घर गिर जाने के कारण यह परिवार खुले आसमान के नीचे समय काटने के लिए विवश हो गया है। ऐसी स्थिति में शासन एवं प्रशासन की कुंभकरण निद्रा तोड़ने के लिए चुन्नी शाह पत्नी एवं तीन छोटे-छोटे बच्चों को लेकर समाहरणालय के सामने बुधवार से भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर हो गया।
बेमौसम बरसात और आंधी तूफान से चुन्नी का आशियाना उजड़ गया। इस गरीब परिवार को सिर छुपाने की जगह नहीं बची।  इसकी सूचना जिला के तमाम अधिकारी को दूरभाष पर एवं लिखित दी गई प्रखंड स्तर से एक जांच टीम गठित किया गया और नुनबट्टा पंचायत में  क्षति का मुआयना किया गया। लेकिन पीड़ितों को अभी तक किसी प्रकार का मुआवजा राशि नहीं दिया गया है।
क्या कहते हैं पीड़ित: पीड़ित चुन्नी शाह का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के कारण हमारी मिट्टी की झोपड़ी उजड़ गई।  हम 5 दिन से पत्नी एवं तीन छोटे-छोटे बच्चों के साथ गांव के दूसरे के घरों में रहकर गुजारा कर रहे हैं। बेघरवार होने की घटना  के बाद पंचायत के जनप्रतिनिधि एवं मुखिया बीना देवी को भी कह कर थक चुके हैं। लेकिन किसी ने कुछ नहीं सुना ।अब हमारे पास रहने की तो दूर खाने को लेकर अनाज भी नहीं । इसलिए हम अपने गांव में बिना खाए कैसे रहे, यह सोचकर  पत्नी एवं बच्चे को लेकर जिला समाहरणालय के द्वार के पास अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। जब तक हमारी मांग पूरी नहीं की जाएगी, तब तक हम भूख हड़ताल पर बैठे रहेंगे। अगर हमें मरना भी पड़े तो हम यही मरेंगे।
क्या कहते हैं  अंचलाधिकारी : इस मुद्दे पर जब गोड्डा  के अंचलाधिकारी प्रदीप शुक्ला से बात की गई तो उनका कहना था कि अंचल द्वारा जांच टीम बनाई गई है । सर्वे चल रहा है । उसके बाद कुछ सोचा जाएगा। उल्लेखनीय है कि जहां एक ओर सरकार हर आपदाओं से निपटने की बात कर रही है । झारखंड सरकार 24 घंटे में उपायुक्त से जांच रिपोर्ट  भेजी जाने का आदेश निर्गत करती है। व 13 मार्च को बारिश हुई है और आज कई दिन बीत जाने के बावजूद भी घर से बेघर हुए परिवार को कोई मदद नहीं मिल पाता है । 18 मार्च 2020 को 10.30 बजे सुबह से भूख हड़ताल पर बैठते हैं लेकिन शाम 5 बजे तक जिला के तमाम अधिकारी समाहरणालय के मुख्य द्वार से  अंदर जाते हैं ।लेकिन किसी ने इसकी सुध नहीं ली । सभी अधिकारी अपने कार्य में व्यस्त थे। प्रशासन की संवेदनशीलता का आलम यह था कि किसी अधिकारी ने यह तक नहीं पूछा कि आप लोग क्यों भूख हड़ताल पर बैठे हैं।