मत्स्य विभाग द्वारा “राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस” का किया गया आयोजन

महेंद्र कुमार यादव

चतरा: प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी 10 जुलाई, 2021 यानी शनिवार को “राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस” का आयोजन जिला मत्स्य कार्यालय, चतरा में किया गया। राज्य स्तर पर इस कार्यक्रम का ऑनलाइन उद्घाटन मुख्यमंत्र हेमंत सोरेन के करकमलों द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत् चयनित लाभुकों के बीच परिसम्पत्ति एवं कार्यादेश दिया गया, जिनमें प्रमुख रूप से कॉर्प हैचरी, लघु फिश फिड मिल, छोटे आकार का आरएएस, शीत गृह, आईस प्लान्ट, आईस बॉक्स के साथ मोटरसाईकिल आदि है। इसके अतिरिक्त मत्स्य बीज उत्पादकों के बीच स्पॉन एवं जाल का वितरण किया गया। मत्स्य विपणन योजनान्तर्गत एक स्टॉल भी दिया गया। मुख्यमंत्री द्वारा सभी मत्स्य कृषक भाई-बहन एवं अधिकारियों से आह्वाहन किया गया कि डॉ० हीरालाल चौधरी से प्रेरणा लेते हुए मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को हासिल करने में सफलता हासिल किया जाए एवं मत्स्य पालन में वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर मत्स्य पालन करें एवं मछली उत्पादन के रिकार्ड स्तर तक पहुँचने का प्रयास करेंगे। मंत्री, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग बादल पत्रलेख ने मत्स्य प्रक्षेत्र की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मछली उत्पादन में केज कल्चर, रिवेराईन फिश फॉर्मिंग, मत्स्य मित्र जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं से विगत वर्षों में झारखण्ड ने देश भर में अपनी पहचान बनाई है। विगत पाँच वर्षों में मछली उत्पादन 104000 मिट्रीक टन से बढ़कर मत्स्य कृषकों के प्रयास से 2,23,000 मिट्रीक टन हो गया है। राज्य के मछली बाजारों एवं ग्रामीण हाट स्थानीय ताजा एवं जिन्दा मछली की उपलब्धता बढ़ी है। मत्स्य बीज उत्पादन में अशातीत वृद्धि हुई है। राज्य के परम्परागत एवं 08 हजार से ज्यादा प्रशिक्षित मत्स्य बीज उत्पादकों द्वारा 1200 करोड़ मत्स्य बीज का उत्पादन किया जा रहा है। मत्स्य बीज उत्पादन में बढ़ोतरी हेतु 123 मत्स्य बीज हैचरी का अधिष्ठापन किया गया है। कृषकों की आय दुगनी करने तथा पूरक आहार आधारित अधिक मत्स्य उत्पादन के उद्देश्य से फिड बेस्ड फिशरीज के तहत् फिश फिड की खरीद पर राज्य सरकार द्वारा प्रक्रियानुरूप 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इसके साथ ही जलाशयों में मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन, नए तालाबों का निर्माण, मत्स्य पालन की नई विधा के रूप में री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम के अधिष्ठापन एवं बायोफ्लोक सिस्टम एवं मोती पालन पर काम करने के लिए उन्होंने विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों का हौसला बढ़ाया। इस अवसर पर जिला मत्स्य कार्यालय, चतरा में श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण मंत्री सत्यानन्द भोगता मत्स्य कृषकों एवं मत्स्य विभाग के पदाधिकारियों एवं कर्मचारी का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि चतरा जिला भी अब नीली क्रांति की ओर बढ़ रहा है। मत्स्य पालन की नई तकनीक से मछली पालन कर उत्पादन को बढ़ाएँ। “राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस के अवसर पर उपस्थित सभी मत्स्य कृषकों को अपनी शुभकामनाएँ दिए। उल्लेखनीय है कि आज ही के दिन, वर्ष 1957 में प्रख्यात मत्स्य वैज्ञानिक डॉ० के० एच० अलीकुन्ही के मार्गदर्शन डॉ० हीरालाल चौधरी को द्वारा मछलियों को हॉर्मोन का सुई देकर प्रेरित प्रजनन कराने में पहली बार सफलता मिली थी। इस तकनीक से मत्स्य बीज की उपलब्धता हेतु नदियों के उपर कई गुणा निर्भरता कम हुई। इसका असर देश के अंर्तस्थलीय मत्स्य उत्पादन पर कई गुणा वृद्धि हुई है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में भारत सरकार के निदेश पर सभी राज्य एवं केन्द्र सरकार के मत्स्य विभागों में तथा मत्स्य संस्थानों में विशेष रूप से मत्स्य कृषक दिवस का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर चतरा जिला के कार्यक्रम में जिला कृषि पदा० अशोक सम्राट, जिला पशुपालन पदा० डॉ० अनिल कुमार, गव्य तकनीकी पदा० अरविन्द कुमार, विधायक प्रतिनिधि अभिषेक निषाद, मत्स्य मित्र एवं मत्स्य कृषक उपस्थित थे तथा विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।