विश्व भूगर्भ जल दिवस पर ‘ पर्यावरण संरक्षण ‘ विषय पर ऑनलाइन डिबेट प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

बोकारो:  पर्यावरण संरक्षण एक वैश्विक मुद्दा है जिसपर सिर्फ 05 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर ध्यान की जगह समेकित रूप से वर्षभर ध्यान दिये जाने की जरूरत है । युवाओं मे पर्यावरण सरंक्षण के प्रति चेतनता विकसित करने की जरूरत है ताकि हरीतिमा हरियाली स्थिति की ओर अग्रसर हो सकें । इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु विद्यार्थियों में संवेदनशील मुद्दे पर जागरूकता को लेकर पर्यावरण संरक्षण पर डिबेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ।

सर्वप्रथम 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन ने भारत सरकार का ध्यान पर्यावरण सरंक्षण की ओर अग्रसर किया । सरकार ने 1976 मे संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 48 A तथा 51 A ( G ) जोड़े । अनुच्छेद 48 A राज्य सरकार को निर्देशित करता है कि वह पर्यावरण की सुरक्षा और उसमें सुधार सुनिश्चित करें तथा देश के वनों तथा वन्यजीवन कि रक्षा करें । अनुच्छेद 51 A ( G ) नागरिकों को कर्तव्य प्रदान करता है कि वे प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करें तथा उसका संवर्द्धन करें व सभी जीवों के प्रति दयालु रहें ।

पर्यावरण सरंक्षण अधिनियम संसद द्वारा 23 मई , 1986 मे पारित हुआ । 19 नवंबर 1986 को लागू हुआ । इस कानून को पारित करने का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किये गये प्रयासों को भारत में कानून बनाकर लागू करना ।

विनाशकारी दोहन नीति के कारण पारिस्थितिकीय असंतुलन भारतीय पर्यावरण में ब्रिटिश काल से दिखने लगा था । स्वंत्र भारत के लोगों में पश्चिमी प्रभाव , औधोगीकरण तथा जनसंख्या विस्फोट के परिणामस्वरूप देश में विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों – ओजोन परत नष्ट होना , अम्लीय वर्षों , ग्रीन हाउस प्रभाव , समुद्री प्रदूषण , ध्वनि प्रदूषण , वायु प्रदूषण, आदि की उत्पत्ति होने लगी । स्पष्ट रूप से स्वन्त्रता पश्चात बढ़ते औद्योगीकरण , शहरीकरण तथा जनसंख्या वृद्धि से पर्यावरण की गुणवत्ता में निरंतर कमी आती गयी ।

पर्यावरण कानून –

जल प्रदूषण संबंधी कानून / रोबर बोडर्स एक्ट 1956/ जल प्रदूषण निवारण नियंत्रण अधिनियम 1974/ जल उपकर प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम 1977/ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986/ वायु प्रदूषण संबंधी अधिनियम / फैक्टरी एक्ट 1948/ इंफ्लेमेबग्स सब्सटा सेज एक्ट 1952/ वायु प्रदूषण निवारण व नियंत्रण अधिनियम 1981/ भुमि प्रदूषण संबंधी अधिनियम / इंडस्ट्रीज डिवेलपमेंट एंड रेगुलेशन अधिनियम 1951/ इंनसेकटी साइट्स अधिनियम 1968/अवरलैंड सीलिंग एंड रेगुलेशन एक्ट 1976/वनतला वन्यजीव संबंधी अधिनियम / फारेस्ट कंजर्वेशन एक्ट 1960/ वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972/ फारेस्ट कंजरवेशन एक्ट 1980/ वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1995/ जैव विविधता अधिनियम 2002

पर्यावरण संबंधित –

जल प्रदूषण / वायु प्रदूषण / वन्यजीव सरंक्षण – संकटग्रस्त पौधे का सरंक्षण / लुप्त होती प्रजातियों की रक्षा / अवैध व्यापार / वन सरंक्षण / पर्यावरण संरक्षण/ जैव विविधता सरंक्षण/राष्ट्रीय जलनीति 2002/ राष्ट्रीय पर्यावरण नीति/ वन अधिकार अधिनियम 2000

पर्यावरण की सुरक्षा में तीन R का महत्व –
REDUCE ( कम उपयोग )
RECYCLE ( पुनः चक्रण )
REUSE ( पुनः उपयोग )

देश ने पर्यावरण कानूनों का व्यापक निर्माण किया है व कई नीतियां पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किये गए पहल को दर्शाती हैं इसके बाबजूद भी युवाओं को आगे आने की जरूरत है , पर्यावरण को सुरक्षित करने के प्रयासों में आम जनता की भागीदारी भी सुनिश्चित करने की जरूरत । शिक्षाविद , पर्यावरणविद , प्रकृति प्रेमी समेत सजीव प्रत्येक वर्ग को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मुखर होने की जरूरत ।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में न्यायपालिका ने भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है । कई जनहित याचिकाओं ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गैर सरकारी संगठनों , नागरिक समाज व आम आदमी की भागीदारों को प्रोत्साहित किया है फलतः सरकार व नीति निर्माताओं की सूची में पर्यावरण प्रथम मुद्दा है तथा वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीर हो गये हैं ।

पर्यावरण संरक्षण मुद्दा इतना समीचीन हो गया है कि इसकी व्यापकता व प्रासंगिकता आज मह्सुश की जा रही है । कोरोना काल में ऑक्सीजन कि किल्लत पर्यावरण असंतुलन की गाथा को परिलक्षित की । आज युवाओं , विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण जैसे समीचीन मुद्दे पर जागरूक किये जाने की पहल की जा रही है ताकि संवेदनशील प्रयास किये जा सके ।

आज ऑनलाइन डिबेट प्रतियोगिता में आयोजन कर्ता सह समन्वयक बोकारो स्टील सिटी कॉलेज बोकारो के प्रभाकर कुमार , साहेबगंज कॉलेज के डॉ रंजीत कुमार सिंह , सिसई कॉलेज राँची के डॉ राधे श्याम सिंह , ए भी एम कॉलेज जमशेदपुर के डॉ संजय कुमार झा , चाईबासा से सामाजिक सह बाल अधिकार कार्यकर्ता विकास दोदराजका जी जुड़े और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर अपनी वक्तव्य रखे ।

ऑनलाइन डिबेट प्रतियोगिता में बरहरवा कॉलेज से विक्रम दास , साहेबगंज कॉलेज से खुशीलाल पंडित , ए भी एम कॉलेज जमशेदपुर से किरण कुमारी , चाईबासा से इशिका दोदराजका , बोकारो स्टील सिटी कॉलेज बोकारो से जीतू कुमार , जया कुमारी , सुजाता कुमारी , सैमुद्दिन अंसारी , धीरज कुमार , खुशबू कुमारी , आरती कुमारी , क्रांति कुमारी , श्वेता तिवारी , सीता कुमारी , अनिशा , मुस्कान कुमारी , रितिका कुमारी , स्वेता कुमारी , सत्यम कुमार , कृष्ण कांत तिवारी , अभिषेक आनंद , सोनी सिंह , गुलाब मोदी , वर्तिका कुमारी , चांदनी कश्यप , पिंकी कुमारी , प्रगति बिरुआ , टाटा कॉलेज चाईबासा से सरस्वती हेम्ब्रम , ऐश्वर्या स्वेन , खुश्बू कुमारी आदि उपस्थित हुए ।

ऑनलाइन डिबेट प्रतियोगिता में कई विद्यार्थियों ने वक्तव्य रखे जिनमें प्रथम स्थान पर बोकारो स्टील सिटी कॉलेज बोकारो से सेमेस्टर 4 की छात्रा स्वेता कुमारी , द्वितीय स्थान पर साहेबगंज कॉलेज के खुशीलाल पंडित एवं तृतीय स्थान पर ए भी एम कॉलेज , गोलमुरी , जमशेदपुर की किरण कुमारी रहीं ।

आज के ऑनलाइन डिबेट प्रतियोगिता मे बोकारो स्टील सिटी कॉलेज बोकारो के सेमेस्टर 2 की छात्रा सुजाता कुमारी ने पर्यावरण सरंक्षण से संबंधित पोस्टर उपलब्ध करवाया , जो संदेश देता सांकेतिक अभिव्यक्ति स्वरूप ।

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