संवेदक के लापरवाही से मायापुर में 50 एकड़ में लगा धान पानी में डूबे, किसानों ने की क्षतिपूर्ति की मांग

मयूरहंड(चतरा)। सिंचाई विभाग के पदाधिकारियों के उदासीनता के कारण जिले के मयूरहंड प्रखंड अंतर्गत मायापुर में किसानों के लगभग पचास एकड़ में लगी धान की फसल डुब गई है। जिससे किसानों को लाखों रुपए का नुक़सान उठाना पड़ रहा है। किसान शंभू राणा ने बताया कि मायापुर टाल भराई कर सिंचाई विभाग द्वारा नहर निर्माण कार्य किया गया और टाल से पानी निकलने को लेकर छोटा पुलिया बनाया गया है। जिसके कारण टाल से जितना पानी निकल रहा उससे चार गुणा पानी टाल में आ रहा है। करमा सेवाल जंगल का अन्य नालों का पानी टाल में आता है। पूर्व में दो छोर से पानी निकलने के लिए किसानों द्वारा पुलिया निर्माण किया गया था, जिसे तोड़कर संवेदक द्वारा भराई कर दी गई है। जिसके कारण किसानों का लगभग पचास एकड़ जमीन डुबा पड़ा हुआ है। मालेश्वर सिंह ने बताया कि टाल लगभग बावन एकड में फैला था, जिसमें भराई कर नहर निर्माण किया गया है। नहर निर्माण होने से टाल का रकबा कम पड़ गया। इसके साथ गहराई के तरफ विभाग द्वारा भराई कर दिया गया। परंतु टाल की गहराई नहीं की गई। इसके अलावा पानी निकलने वाले आउटलेट दस फीट बनाने को कहा गया पर मात्र तीन फीट बनाया गया। जिससे टाल का पानी किसानों के उपजाऊ जमीन में जाकर जमा हो जा रहा है। किसानो ने सिंचाई विभाग से क्षतिपूर्ति की मांग करते हुए कहा है कि मांगे नही पुरा होने पर कार्य बंद करा दिया जाएगा। सिंचाई विभाग के एई पप्पू कुमार ने पुछे जाने पर बताया कि गांव के हीं लोगों द्वारा मछली पालने के लिए आउटलेट में जाली लगा दिया गया था। जिसके कारण पानी की निकासी कम हो रही थी।