तीन दिनों से हो रही बारिश से जन जीवन हुआ अस्त व्यस्त

लगातार उफान मार रही नदियां, दर्जनों गरीबों के घर हुए ध्वस्त, कई गांव बने टापू
चतरा/कुंदा/मयूरहंड/सिमरिया। तीन दिनों से लगातार रुक-रुक कर हो रही बारिश से जिले में आम जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। साथ ही मयूरहंड, गिद्धौर, कुंदा, पत्थलगडा, सिमरिया व टंडवा आदि प्रखंड के दर्जनों गरीबों का घर बारिश की भेंट चढ़ गई हैं, वही कुंदा, कान्हाचटी, टंडवा व सिमरिया के दर्जनों गांव नदियों में बाढ़ आ जाने के बाद पुल के अभाव में टापू में तबदील हो गया है, ऐसे कई गांव है जिनका पंचायत व प्रखंड मुख्यालय से संर्पक टूट गया है। पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही के साथ धूप नहीं निकली है। झमाझम बारिश से नदी और नालों में पानी उफान पर है। खेत-क्यारी जल मग्न हो गए हैं। किसान कृषि कार्य में लगे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर बारिश से आम-आवाम परेशान हैं। जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। लगातार बारिश से नदियों के उफान पर रहने के कारण गिद्धौर व पत्थलगडा के करीब दो दर्जन गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। दर्जनों गरीबों के कच्चे मकान भी ध्वस्त हो गए हैं। सिमरिया प्रखंड क्षेत्र केवटा गांव निवासी गरीब धीरो गंझू पिता पूना गंझू का खपरैल घर गिर गया। जिससे घर में रखे सामान दबकर बर्बाद हो गया। इस घटना से गरीब को परिवार के साथ ध्वस्त घर में जैसे तैसे रहना पड़ रहा है और घर में रखे लगभग जरुरी सामान नष्ट हो गए हैं। पीड़ित अत्यंत गरीब है। दुसरी ओर में लगातार बारिश से मयूरहंड प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों घरों में पानी घुस गया तथा दर्जनों गरीबों का आशियाना ध्वस्त हो गया है। जिससे पीड़ित परिवारों को सर छुपाने के लिए दुसरे के घरों में शरण लेना पड़ रहा है। सोकी पंचायत के नवडीहा में सुरज कुमार, कुंदन पंडा, कदगांवाकला पंचायत के पकरीया निवासी आशा देवी तथा मंझौली के तेतरी देवी का खपरैल मकान ध्वस्त हो गया। पीड़ित परिवारों ने अंचलाधिकारी से आपदा के तहत क्षतिपूर्ति की मांग की है। इस विषय पर अंचलाधिकारी ने बताया कि राजस्व कर्मचारी को सत्यापन के लिए निर्देश दिया गया है। सत्यापन होने के बाद स्विकृति के लिए वरिय पदाधिकारियों को भेजा जाएगा। आंशिक रूप से क्षति होने पर बत्तीस हजार तथा पूर्ण क्षतिग्रस्त होने पर 72 हजार रुपए देने का प्रावधान है।