Rail की आकृति का विद्यालय बना आकर्षण का केंद्र

– गोड्डा जिला में स्थित उर्दू मध्य विद्यालय, लौगांय को दूर-दूर से देखने आते हैं लोग

गोड्डा से अभय पलिवार की रिपोर्ट
गोड्डा: इस विद्यालय की संरचना को देखकर लोग हैरत में पड़ जाते हैं। अंजान लोगों को भ्रम हो सकता है कि यह विद्यालय है या रेल (Rail) का डब्बा। विद्यालय की आकृति ही ऐसी है कि लोगों को भ्रम होना स्वाभाविक है। लेकिन नजदीक से देखने पर वास्तविकता का एहसास हो जाता है।
हम बात कर रहे हैं झारखंड एवं बिहार के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित महागामा प्रखंड के उर्दू मध्य विद्यालय, लौगांय की, जो देखने में रेल के डब्बे की तरह लगता है। रेल की तरह विद्यालय की कक्षा का नामकरण एस 1, एस 2, एस 3….. रखा गया है। रेलवे की टिकट काउंटर की तरह पेंटिंग भी विद्यालय में किया गया है। रेल डिब्बा में चढ़ने के लिए हैंडल की आकृति विद्यालय कक्षा के प्रवेश द्वार पर बनी हुई है।
दरअसल, विद्यालय को रेलवे की तरह शक्ल विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोहम्मद वालुद्दीन की सोच का कमाल है, जिसे सरजमीन पर उतारने में विद्यालय के शिक्षकों की भी अहम भूमिका रही है। अपने फेसबुक वॉल पर प्रधानाध्यापक मोहम्मद वालुद्दीन ने लिखा है कि उन्होंने 24 जनवरी 2017 को इस विद्यालय के प्रधानाध्यापक पद पर योगदान किया। विद्यालय में बुनियादी सुविधा का घोर अभाव था। उनके योगदान के कुछ दिनों बाद जिला के शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं परिवर्तन दल के सदस्य पहुंचे। प्रधानाध्यापक को बताया गया कि आपके स्कूल को देखने रांची की टीम आ रही है। स्कूल में बहुत कुछ कमी है। बच्चों का आनंददाई कक्ष, विद्यालय प्रबंध समिति के दीवार लेखन, स्वच्छ पेयजल, शौचालय आदि मूलभूत सुविधाओं की कमी है। आप 10 दिनों के अंदर सभी कार्य करवा लें।
रांची की टीम जब विद्यालय निरीक्षण करने के लिए पहुंची, तो विद्यालय की विधि व्यवस्था देख कर बहुत खुश हुई। जांच टीम के सदस्यों ने प्रधानाध्यापक को कहा कि जितने विद्यालय का निरीक्षण किए हैं, सबसे अच्छा आपका विद्यालय पाए।
उसी दिन प्रधानाध्यापक मोहम्मद वालुद्दीन ठान लिया कि विद्यालय को जिला का नमूना बनाएंगे। व्हाट्सएप पर उन्होंने राजस्थान के अलवर जिला का एक ट्रेननुमा स्कूल देखा। ट्रेननुमा स्कूल को उन्होंने तत्कालीन प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी अशोक पाल को दिखाया। बीईईओ ने प्रधानाध्यापक को विद्यालय को ट्रेननुमा शक्ल देने की हरी झंडी दिखा दी। प्रधानाध्यापक एवं सहायक शिक्षकों ने मिलकर ट्रेन नुमा संरचना तैयार किया और पेंटर से विद्यालय को पेंट करवा दिया। प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी जब निरीक्षण के लिए पहुंचे तो उन्होंने क्लास का नाम भी ट्रेन की बोगी की तरह एस 1, एस 2, एस 3……. करने का सुझाव दिया। बुकिंग काउंटर की तरह भी पेंट किया गया। प्रधानाध्यापक ने बताया कि इन कार्यों को अंजाम देने में बीईईओ के अलावे तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी धीरेंद्र कुमार अग्रवाल की भी महती भूमिका रही। विद्यालय को ट्रेन नुमा अंदाज में पेंटिंग कराए जाने के बाद विद्यालय का आकर्षण काफी बढ़ गया है।