विस्थापितों के मांग को लेकर सात नवंबर को राजभवन मार्च

रांची। जल,जमीन जंगल की रक्षा एवं विस्थापन और विस्थापितों के अधिकार पर एक दिवसीय सेमिनार एसडीसी सभागार पुरुलिया रोड रांची में,लखन लाल महतो, जेराम जोराल्ड कुजूर मिथलेश दांगी, लष्मी की अध्यक्षता में हुआ।सेमिनार की शुरुआत में प्रतिबेदान प्रस्तुत करते हुए भुबनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि झारखंड वासी विस्थापन से तबाह है, यहां की जमीन का ओने पौने दाम है। जबरन अधिग्रहण होता रहा है , जिसमें अधिकतर जमीने आदिवासी ,दलित और गरीब किसानों की है ।अभी तक लगभग 5000000 लोग विस्थापित हो चुके हैं और विस्थापित सभी प्रभावित लोगों की संख्या लगभग एक करोड़ है। सरकारी और निजीकंपनियों दोनों से यहां विस्थापन हुआ है। सबसे अधिक विस्थापन कोल इंडिया लिमिटेड सीसीएल ,बीसीसीएल, एचईसी ,डिस्को ,टेल्को ,जिंदल, पावर लिमिटेड ,अदानी पावर लिमिटेड एवं अन्य उद्योग एवं सिंचाई परियोजनाओं से विस्थापन हुआ है।सेमिनार में आगे के आन्दोलन पर सर्व सम्मति से तय किया गया कि 7 नवंबर को विस्थापितों के मांग को लेकर राजभवन मार्च किया जायेग।
इस सेमिनार में कांग्रेस के केशब कमलेश महतो,राजद के राजेश यादव सी.पी.एम. के गोपिकान्त बक्शी , डर वासवी कीड़ो ,माले के पुष्कर महतो केडी सिंह झामुमो के फागु बेसरा ,विजय गुड़िया महेंद्र पाठक,अब्दुल्लाह मुक्ति अज़हर कासमी राजेन्द्र यादव ,मुनि हांसदा,काशीनाथ सिंह,सतेंद्र सिंह एवं अजय सिंह मुख्य रूप से शामिल हुए।