अधिकार मांगने से नहीं मिलती, लड़कर ली जाती है और इसे धानुक समाज लड़कर लेगी: डॉ रामशंकर 

धानुक जाति का एक दिवसीय सम्मेलन हुआ संपन्न

पांकी से लौकेश सिंह की रिपोर्ट

पांकी: पलामू जिले के विभिन्न क्षेत्रों पांकी, तरहसी, लेस्लीगंज, मनातू, सामगढ़, सिल्दिल्या, कोनवाई, चंद्रपुर, बान्दुबार, चौबानटाड़, बनखेता, डंडार,समेत प्रखंड व जिला के लगभग सभी गांवों से लोग दिवसीय सम्मेलन में जाने को गुलजार दिखा। वहीं जिले व प्रखंड स्तर पर समेलन में जाने को लेकर अपने-अपने परिवहन से तथा सामूहिक बसों द्वारा समेलन में जाते दिए।बताते चलें कि अखिल भारतीय धानुक उत्थान महासंघ, झारखण्ड प्रदेश की ओर से 03 अक्टूबर 2021 रविवार को एक दिवसीय राज्य सम्मेलन का आयोजन किया गया।जो रांची के कटहल मोड़ स्थित एकलव्य बैंक्वेट हॉल में आयोजित सम्मेलन में बोलते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री सह पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुसूचित जाति आयोग के डॉ रामशंकर कठेरिया ने कहा कि अधिकार मांगने से नहीं मिलती, लड़ कर ली जाती है।उन्होंने कहा कि धानुक समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है,लेकिन इसको पकड़ कर हम नहीं बैठे रहेंगे। बल्कि नया इतिहास भी हम सभी मिलकर कर बनायेंगे।उन्होंने कहा कि धानुक समाज को आर्थिक एवं सामाजिक और शैक्षणिक रूप से भी मजबूत होना पड़ेगा तभी हम समाज और देश की भलाई कर सकते हैं।पूरे भारत के धानुक समाज को एकजुट करने की जरुरत है।धानुक जाति को अनुसूचित जाति में शामिल होना चाहिए। इसमें सरकार को कोई परेशानी नहीं है।देश में धानुक जाति अनुसूचित जाति में शामिल हैं। कुछ राज्यों में अनुसूचित जनजाति में है।लेकिन झारखण्ड- बिहार में पिछड़ी जाति में शामिल कर समाज के साथ अन्याय हो रहा है, इससे समाज की तरक्की नहीं हो सकती है।पूर्व सांसद नारायण सिंह केसरी ने कहा कि धानुक समाज को अधिकार पाने के लिए सड़कों पर उतर कर लड़ाई लड़नी पड़ेगी।हम मध्यप्रदेश से आते हैं, वहां धानुक समाज अनुसूचित जाति से आता है। उन्होंने कहा कि धानुक समाज अपना अधिकार पाने के लिए लड़ाई लड़े,हम समाज के साथ हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि आर्थिक और राजनैतिक रूप से कमजोरी को पहचाने बिना राजनैतिक रूप से और सामाजिक रूप से मजबूत हुए समाज का भला नहीं हो सकता है। अनिल नागर ने कहा कि धानुक समाज के अन्दर के कमजोरी को दूर कर समाज को आगे बढ़ना होगा।अखिल भारतीय धानुक उत्थान महासंघ, झारखण्ड प्रदेश के संरक्षक लाल सूरज ने कहा कि समाज को अधिकार के लिए अब आर-पार की लड़ाई-लड़ी जाएगी।राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कृष्ण चंद्र शास्त्री ने कहा कि बिहार- झारखण्ड मिलकर लड़ेंगे।अखिल भारतीय धानुक उत्थान महासंघ,बिहार प्रदेश के महासचिव महेंद्र भारती ने कहा कि धानुक समाज को अपने हक अधिकार के लिए जमीन में उतरकर संघर्ष करना होगा।मौके पर मुनिलाल सिंह, लाल सूरज,कृष्ण चन्द्र शास्त्री, महेंद्र भारती,समरेंद्र प्रसाद,जे के मंडल,नारायण मंडल,पीसी मंडल,विकास कुमार,राम जन्म सिंह, शैलेन्द्र कुमार सिंह,कार्तिक सिंह,अजय कुमार सिंह,कन्हाई लाल सिंह, बी.के.सिंह,पारसनाथ सिंह,कोशल राय,अशोक मंडल, दशरथ राउत,संजय राउत,गुलाब महतो ,राजेश कुमार,सतिश कुमार,अनिल सिंह, रुपेश कुमार सिंह,सिंधु सिंह,समेत सैकड़ों धानुक समाज के हजारों लोग उपस्थित थे।एक दिवसीय महासम्मेलन मे 12 सुत्री प्रस्ताव व घोषणा पत्र के अनुसार लिया गया निर्णय।

1. धानुक जाति को अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करना
2. शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी एवं प्रतियोगिता पर आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना
3. मेधावी छात्र/छात्राओं के लिए रांची में छात्रावास का निर्माण करना
4.धानुक जाति के विकास के लिए बड़े पैमाने पर कोष संग्रह करना
5.सामूहिक विवाह को बढ़ावा देना
6.धानुक समाज के ऊपर किसी तरह का अन्याय होने पर समाज के द्वारा मजबूती के साथ तन-मन-धन से सहयोग करना
7. झारखण्ड राज्य के धानुक बाहुल्य क्षेत्रों में आगामी लोकसभा/विधानसभा/पंचायत के चुनाव में स्वजातीय प्रत्याशी उतारना
8. झारखण्ड राज्य में पिछड़ा वर्गों को 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग सरकार से करना
9. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अति पिछड़ा वर्ग को अलग से आरक्षण की मांग करना
10. झारखण्ड राज्य के प्रत्येक जिला में जहां धानुक समाज निवास करते हों, वहां कमिटी का गठन करना
11. महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं की कमिटी का गठन करना
12.झारखण्ड राज्य स्तरीय युवा मोर्चा का गठन करना