घाघरा : शिक्षिका के साथ प्रधानाध्यापिका व अन्य शिक्षिकाओं ने की मारपीट

शिक्षिका सतमी के पेट मे पल रहे 8 माह के बच्चे की मौत

गुमला/घाघरा :- घाघरा थाना क्षेत्र के पुटो स्थित कार्तिक उरांव बाल विकास विद्यालय के शिक्षिका सतमी कुमारी के साथ विद्यालय के ही प्रधानाध्यापिका व अन्य सहायक शिक्षिकाओं के द्वारा हमला कर मारपीट करने के बाद सतमी के पेट में पल रहे 8 माह के बच्चे की मौत का मामला प्रकाश में आया है।इस संबंध में सतमी ने बताया कि वह तारा गुट्टू गांव की रहने वाली है और पुटो में रहकर उसी विद्यालय में पढ़ाने का काम करती है।विद्यालय में कई विषयों को लेकर दो ग्रुप बन गया है।

जिसमें प्रधानाध्यापिका के साथ अन्य और शिक्षिका शामिल हैं। उनके द्वारा लगातार हमारे साथ मारपीट किया जा रहा था। 7 जुलाई को भी मारपीट किया गया था। जिसका लिखित शिकायत हमने घाघरा थाना में 9 जुलाई को कर दिया था। इस दौरान पुलिस ने कहा था कि पूरे मामले की जांच विद्यालय में जाकर करेंगे। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सतमी पुलिस का आने का इंतजार करती रही। लेकिन पुलिस 14 जुलाई तक गांव पहुंची ना ही कोई शुद्ध लिया।इसी दौरान दोबारा प्रधानाध्यापिका और शिक्षिकाओं के द्वारा 15 जुलाई को उसके किराए के मकान में आकर अचानक ही हमला कर दिया गया। हमला करने के दौरान लात व हाथ से कई बार पेट में भी वार कर दिया। जिससे उसके पेट में दर्द शुरू हो गया। तब वह घाघरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आकर महिला चिकित्सक डॉ मनीषा कुमारी से मिली तो मनीषा कुमारी ने उसे अल्ट्रासाउंड करने का सलाह दिया।

16 जुलाई को अल्ट्रासाउंड कराने के लिएभेजा गया। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट जब लेकर डॉक्टर के पास दोबारा घाघरा आई तो रात में ही डॉ मनीषा कुमारी ने बताया कि बच्चे का पेट में ही मौत हो चुका है। पुलिस के ऊपर आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस के द्वारा कार्रवाई नहीं किया गया। मामले को दबाने का प्रयास किया गया। जिसके चलते इतना बड़ा हादसा हुआ है।पूरे मामले को लेकर गंभीरता से जांच कर अधिकारियों से कार्रवाई करने का मांग किया है।

थाना प्रभारी उपेंद्र महतो ने कहा कि महिला के द्वारा किसी भी तरह का कोई लिखित व मौखिक शिकायत हमारे पास नहीं किया गया था अगर शिकायत किया गया होता तो निश्चित रूप से जांच कर कार्रवाई की जाती महिला के द्वारा लगाया गया आरोप बेबुनियाद है।मौत का खबर सुनकर पीड़ित सप्तमी कुमारी का रो-रोकर बुरा हाल था वह बार-बार कह रही थी कि बड़ी मुश्किल से 8 माह तक हमने गर्भ में अपने बच्चे को पाला समय से हमें मदद मिलता तो हमारे बच्चे की मौत नहीं होती।