समाजशास्त्र विषय और असीम संभावनाएं

विचार

वर्तमान समय में समाजशास्त्र काफी लोकप्रिय विषय के रूप में उभर कर सामने आया है। हालांकि एक विषय के रुप में समाजशास्त्र का जन्म 1838 ई०मे हुआ है ‌,परंतु मात्र 183 वर्ष के सफर में वैश्विक स्तर से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक,संघ लोकसेवा आयोग के सिविल सर्विसेज परीक्षा में बतौर वैकल्पिक विषय से लेकर प्रोफेसर की नौकरी तक, सीडीपीओ से लेकर एनजीओ तक में इस विषय की धूम मची है। और क्यों न हो?जबकि यह विषय न सिर्फ समाज का बल्कि सामाजिक संबंधों, सामाजिक अंत:क्रियाओं, सामाजिक प्रक्रियाओं तथा सामाजिक परिवर्तनों के साथ – साथ सामाजिक संरचनाओं और प्रकार्यों का वैज्ञानिक आधार पर अध्ययन करता है।आजादी से पहले जहां समाजशास्त्र की अधिकांशतः पुस्तकें अंग्रेजी भाषा में थी, वहीं आजादी के बाद हिन्दी भाषा में इस विषय की अनेकानेक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। समाजशास्त्र के संस्थापक विद्वानों में अगस्ट काॅम्टे से लेकर कार्ल मार्क्स,इमाईल दुर्खीम, मैक्स वेबर,विलफ्रेड परेटो ने समाजशास्त्र को एक नई उड़ान दी, जबकि भारतीय समाज के पौराणिक व धार्मिक ग्रंथों के आधार पर भारतीय विद्याशास्त्र परिप्रेक्ष्य का विकास ने इस विषय को आम लोगों तक पहुँचाया।

sanjay jha
लेखक: एस के झा

भारत में 1919 से लेकर अब तक के सफर में इस विषय ने अमूमन सभी विश्वविद्यालयों में अपनी पहचान बनायी है।आज इस विषय से इंटरमीडिएट, स्नातक,स्नातकोत्तर,एम.फिल , पीएचडी और डी.लिट तक की उपाधि ग्रहण की जा रही है। युवा इस विषय को लेकरअपना करियर संवार रहे हैं। सिविल सर्विसेज परीक्षा में इस विषय को रखने वाले अनेक अभ्यार्थियों ने न सिर्फ वन टू टेन में अपना स्थान बनाया है,बल्कि टाॅपर भी रहे हैं। क्योंकि समाजशास्त्र काफी अंकदायी विषय के रुप में भी जाना जाता है।शोध और अन्वेषण की असीम संभावनाएं इस विषय में देखी जा सकती हैं। राज्य स्तरीय सिविल सेवा परीक्षा में तो इस विषय का प्रभाव ही कुछ और है।कई युवा यूजीसी से नेट व जेआरएफ कर फेलोशिप प्राप्त कर रहे हैं और आगे प्रोफेसर की नौकरी में जा रहे हैं।अब तो इस विषय ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी दस्तक दे दिया है।
कोल्हान विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र जनजातीय बहुल हैं। पूर्वी सिंहभूम,पश्चिम सिंहभूम तथा सरायकेला खरसावां क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के तहत पेशा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। जहां समाजशास्त्र की असीम संभावनाएं है। सरकार को चाहिए कि इस विषय का सातवीं-आठवीं कक्षा से ही एक अलग विषय के रूप में पठन – पाठन करवाये। कोल्हान विश्वविद्यालय के अंतर्गत सरकार ने वर्ष 2012 में कई महाविद्यालयों यथा- महिला कालेज चाईबासा,टाटा कालेज चाईबासा, घाटशिला कालेज, घाटशिला,एस.पी.कालेज चांडिल,काॅपरेटिव कालेज, जमशेदपुर तथा जमशेदपुर विमेंस कॉलेज, जमशेदपुर में इस विषय के 2-2 पद सृजित किये है। ताकि इन महाविद्यालयों में भी समाजशास्त्र विषय का पठन-पाठन हो सके। जबकि एबीएम कॉलेज जमशेदपुर में वर्षों से समाजशास्त्र विषय का पठन-पाठन हो रहा है।

लेखक: डॉ०एस०के०झा
महासचिव, झारखंड सोशियोलॉजिकल सोसायटी

उपर के वक्तव्य लेखक के अपने हैं।