पं. राजकुमार शुक्ल जयंती पर साहित्योदय शब्दांजलि का विशेष आयोजन

रांची: अंतरराष्ट्रीय साहित्य कला संगम पर पंडित राजकुमार शुक्ल की 146वीं जयंती पर विशेष शब्दांजलि का आयोजन किया गया। राजकुमार शुक्ल फाउण्डेशन के तत्वावधान में आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में दनिया भर के विद्वानों ने लिया भाग। आजादी की लड़ाई में उनके संघर्ष को देखते हुए मांग उठी की पंडित राजकुमार शुक्ल को भारत रत्न मिलना चाहिए। शुक्ल के नाम पर म्यूजियम की स्थापना ,एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में शुक्ल के संघर्ष की सही जानकारी , राजधानी दिल्ली में शुक्ल के नाम हॉस्पिटल ,सड़क ,स्टेडियम का नामकरण व म्यूजियम का निर्माण आदि।

कार्यक्रम का उद्घाटन परियोजना अधिकारी, बिहार विधान परिषद्,व शोधकर्ता श्री भैरव लाल दास ने किया। कार्यक्रम का विषय: “# आजादी के 75 वी अमृत महोत्सव में महात्मा गांधी और पंडित राजकुमार शुक्ल का योगदान#” था.

इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री भैरव लाल दास ने कहा कि राजकुमार शुक्ल के बिना महात्मा गांधी का इतिहास अधूरा है क्योंकि राजकुमार शुक्ल जैसा हठी व्यक्ति जिन्होंने गांधी जी को चंपारण लाने पर मजबूर किया । आप कल्पना कर सकते हैं उस समय का दौर जहां आवागमन के बहुत सीमित संसाधन थे वैसे ही स्थिति में राजकुमार शुक्ल जो पेशे से किसान थे। उन्होंने कभी कोलकाता कभी लखनऊ कभी साबरमती गुजरात गांधी जी से मिलने जाते थे आप समझ सकते हैं कि राजकुमार शुक्ल का व्यक्तित्व क्या था जिन्होंने अपनी पूरी जमीन, गाय बछड़ा,, तक आंदोलन के लिए न्योछावर कर दिया उस आजादी के दीवाने को भारत रत्न से सुशोभित किया जाना चाहिए तभी हम उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं ! उन्होंने कहा कि इतिहासकारों ने उनके संघर्ष के गाथा को इतिहास में जो जगह मिलनी चाहिए थी उसे नहीं दी है साथ ही एनसीईआरटी पाठ्यक्रम में बहुत सारी त्रुटियां है जिसे दूर किया जाना चाहिए और बच्चों के बीच उनके संघर्ष का सही चित्रण होना चाहिए।

इस अवसर पर झारखंड विधानसभा के संयुक्त सचिव मिथिलेश कुमार मिश्र ने कहा कि राजकुमार शुक्ल जैसा व्यक्तित्व को राज्य एवम केंद्र सरकार का शिक्षा विभाग अपने पाठ्यक्रम में शामिल करें ताकि देश – दुनिया में उनके द्वारा किया गया अंग्रेजो के खिलाफ संघर्ष की सच्ची तस्वीर और इतिहास के बारे में संबंधित सामग्री छात्रों और युवाओ तक उपलब्ध हो । उन्होंने कहा की अग्रेज ऐमन ने राजकुमार शुक्ल के निधन के बाद कहा था ‘ शुक्ल अकेला मर्द था जो हमसे बराबर लड़ता रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पंडित राजकुमार शुक्ल फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय राय ने कहा की देश के आजादी के 75 साल का आजाद अमृत महोत्सव हम लोग मना रहे हैं ऐसे में केंद्र सरकार के जरिए राजकुमार शुक्ल के संघर्ष का सही मूल्यांकन होना चाहिए और ऐसे महामानव को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए। साथ ही देश की राजधानी दिल्ली सहित अन्य प्रदेशों में उनके नाम पर सड़क ,हॉस्पिटल ,स्टेडियम, म्यूजियम का निर्माण होना चाहिए ताकि हमारे बच्चे भी उनके संघर्ष की गाथा को जान सके । उन्होंने कहा की
शुक्ल जी के संदर्भ में सोशल मीडिया पर या किसी समारोह या किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए वक्तव्य में इतिहास से परे और प्रामाणिकता के बिना जो बातें कही जाती है उन पर इतिहासकार विचार करें और सही साक्ष्य के आधार पर इन बातों को ठीक करें ।
उन्होंने कहा कि राजकुमार शुक्ल फाउंडेशन भारत सरकार से उन्हें भारत रत्न दिलवाने के संदर्भ में भरपूर प्रयास करते आ रही है और आगे भी करेगी। क्योंकि हमारी संस्था राष्ट्रीय स्तर की संस्था है अतः हमारा उद्देश्य है कि हम धर्म, वर्ग ,जाति से ऊपर उठकर शुक्ल जी के योगदान को जन-जन तक पहुंचाएं।
हमारी संस्था का यह भी प्रयास है कि उन पर बहुत सारी डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनने के बावजूद उनके ऊपर अभी तक कोई फीचर फिल्म नहीं बनी है हमारा यह प्रयास है कि हम भविष्य में शुक्ल जी पर एक विशेष फीचर फिल्म बनाए जिसमें परामर्श हेतु बहुत सारे इतिहासकार साहित्यकार और शोधकर्ता शामिल होंगे । साथ ही शुक्ल के संदर्भ में प्रामाणिकता के साथ हम जन-जन तक पहुंचे यह हमारा प्रयास होगा ।
अजय राय ने कहा कि फाउंडेशन का यह भी उद्देश्य है कि शुक्ल जी के ऊपर जिन लोगों ने विशेष काम किया है उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाए ।संस्था का यह भी प्रयास है कि भविष्य में संस्थान के क्रियाकलाप योगदान और विद्वानों के आलेख के साथ एक स्मारिका का प्रकाशन होगा जिसे जन-जन तक पहुंचाना हमारा उद्देश्य होगा ताकि शुक्ल जी के जीवन को प्रामाणिकता के साथ लोगों तक लाया जा सके।

इस अवसर पर फिल्म अभिनेता व निर्माता निर्देशक श्री ऋषि प्रकाश मिश्रा ने कहा की राजकुमार शुक्ल के कार्यो को समेटना हम सब की जिम्मेवारी बनती है। उन्होंने कहा की राजकुमार शुक्ल कोई अनपढ़ नहीं थे अगर वो अनपढ़ होते तो रोज अपनी डायरी नहीं लिखते और उनकी इतनी दूर दृष्टि नहीं होती की चम्पारण से देस के कई प्रांतो में जाकर गाँधी को वो लेकर आते। कही न कहीं इतिहासकारो ने उनके साथ न्याय नहीं किया और आधे अधूरे जानकारी देकर उनके संघर्ष को दबाने का प्रयास हुआ। राजकुमार शुक्ल और उनकी जिद न होती तो चंपारण आंदोलन से गांधी का जुड़ाव शायद ही संभव हो पाता।

 

इस अवसर पर जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय युवा केंद्र के कार्यक्रम संयोजक श्री भूपेंद्र प्रसाद ने कहा की महात्मा गांधी भारत की आजादी के लिए चली लड़ाई के सबसे बड़े नायक हैं, यह कहने वाली बात नहीं. लेकिन यही गांधी जब 21 सालों तक दक्षिण अफ्रीका रहकर 1915 में देश लौटे तो भारत के बारे में ज्यादा कुछ नही जानते थे. जितना जानते थे, वह सतही और किताबी था. ऐसे में उनके राजनीतिक गुरु गोपालकृष्ण गोखले ने सलाह दी कि वे कम से कम एक बार पूरे देश का भ्रमण करें. उन्होंने ऐसा ही किया. इसके बाद भी वे तय न कर सके कि उनकी आगे की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधि कैसे आगे बढ़ेगी. ऐसे में उन्हें राजकुमार शुक्ल के रूप में व्यक्तित्व से मिलना हुआ जो चंपारण में निलहों जे जुल्म से पीड़ित थे और यही चंपारण आंदोलन गांधी के लिए मील का पत्थर साबित हुआ

न्यूयॉर्क से शामिल हॉलीवुड के फिल्म निर्देशक कृपा रंजन प्रसाद ने कहा की इतने बड़े सख्सियत का नाम हमलोग नहीं जान पा रहे है जो भारत के आजादी के टर्निग पॉइंट रहे है ,उन्होंने कहा की हमारा भी प्रयास होगा उनके व्यक्तित्व पर कोई फिल्म का निर्माण करूँ।
उन्होंने कहा की चंपारण किसान आंदोलन आजादी की लड़ाई में मील का पत्थर साबित हुआ था, लेकिन इसकी वजह बने राजकुमार शुक्ल को इतिहास में वाजिब स्थान न मिल सका. जो काफी अफसोस जनक है।
उन्होंने कहा की चंपारण का किसान आंदोलन अप्रैल 1917 में हुआ था. गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह और अहिंसा के अपने आजमाए हुए अस्र का भारत में पहला प्रयोग चंपारण की धरती पर ही किया. यहीं उन्होंने यह भी तय किया कि वे आगे से केवल एक कपड़े पर ही गुजर-बसर करेंगे.

कार्यक्रम की शुरुआत में पंडित राजकुमार शुक्ल और गांधी के ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का बेहतरीन संचालन प्रख्यात टीवी पत्रकार, मंच सञ्चालक और सुप्रसिद्ध साहित्यकार पंकज प्रियम ने किया । देररात तक चले इस कार्यक्रम का दुनियाभर के 100 से अधिक देश में सीधा प्रसारण हुआ जिससे बड़ी संख्या में दर्शक जुड़े रहे और शब्दांजलि के माध्यम से अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किया । साहित्योदय के संस्थापक अध्यक्ष पंकज प्रियम ने बताया कि साहित्योदय विगत 3 वर्षों से विभिन्न मुद्दों पर सक्रियता से आवाज़ उठा रहा है और समाज को एक नई दिशा देने को कृत संकल्प है।
कार्यक्रम में सहयोग के लिए जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय युवा केंद्र को भी धन्यवाद ज्ञापन किया गया।